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आईपीपीसी-2018: खेती से भी पैदा होती हैं ग्रीन हाउस गैसें

DSC_3990लखनऊ: नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) एवं इंडियन सोसाइटी ऑफ प्लांट फिजियोलॉजी (आईपीपीसी) द्वारा इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में संयुक्त रूप से आयोजित चौथी इंटरनेशनल प्लांट फिजियोलॉजी कांग्रेस (आईपीपीसी-2018) के दूसरे दिन स्मृति व्याख्यानों में तेजपुर विश्वविद्यालय, असम के डॉ कुशल कुमार बरुआ ने कृषि गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले ग्रीनहाउस गैसों एवं भारतीय परिप्रेक्ष्य में इनके प्रभावों की चर्चा की.

डॉ कुशल कुमार बरुआ ने बताया कि कृषि गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले मीथेन एवं नाइट्रस ऑक्साइड गैसें जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार गैसों में से एक हैं. गेहूं एवं चावल के पौधों पर किये गए अपने प्रयोगों के आधार पर उन्होंने बताया कि पादप वृद्धि हारमोनों के पत्तियों पर छिडकाव, जैव-कार्बनिक उर्वरक (हरित खाद) के प्रयोग एवं अकार्बनिक उपचार के द्वारा इन गैसों के उत्सर्जन में कमी प्राप्त की जा सकती है.

दूसरे दिन 3 विशिष्ट व्याख्यान, 3 स्मृति व्याख्यान एवं 18 सत्र व्याख्यान प्रस्तुत किये गए. विशिष्ट व्याख्यानों में डॉ स्टीफेन वेंकेलए कोपेनहेगेन विश्वविद्यालय द्वारा पौधों के वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करने में सूक्ष्म प्रोटीनों की भूमिका एवं फ़्रांस के डॉ ज्यां फिलिप कोम्बिअर द्वारा सूक्ष्म आरएनए की क्रियाओंके नियंत्रण पर चर्चा की. वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो जेपी खुराना ने फूल खिलने के लिए पौधे में होने वाली आवश्यक गतिविधियों एवं इनसे सम्बंधित नियंत्रक तंत्र के बारे में किये अपने शोध से अवगत कराया.

DSC_2851इसके अतिरिक्त डॉ ऊषा विजयराघवन (इन्डियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस, बंगलुरु) ने धान के फूलों के विकास में शामिल कुछ ट्रांसक्रिप्शन नियंत्रकों की भूमिका की चर्चा की. संभलपुर विश्वविद्यालय के प्रो पीके मोहपात्रा द्वारा धान की बालियों में दानों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी गुणवत्ता में कमी आने और इससे सम्बंधित क्रियाओं के अध्ययन पर अपना शोध प्रस्तुत किया. शेफील्ड विश्वविद्यालय की प्रो जूली ग्रे ने बताया कि पत्तियों पर मौजूद रंध्रों की संख्या को नियंत्रित कर के उन्हें सूखे को सहने लायक बनाया जा सकता है. इसके साथ सायंकालीन पोस्टर सत्र मेंविभिन्न शोधार्थियों द्वारा 400 से अधिक पोस्टरों के माध्यम से अपने शोध कार्यों को प्रस्तुत किया गया. वही विभिन्न प्रतिभागियों हेतु पौधों में आरएनए के माध्यम से जीनों में संपादन पर एक कार्यशाला आयोजित की गयी जिसमें प्रतिभागियों ने भाग लिया और एक विशिष्ट सत्र में अमेरिकन सोसायटी ऑफ़ प्लांट बायोलॉजी के सीईओ क्रिस्पिन टेलर ने संबोधित किया.

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