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आईसीएआर-सीआईएस मलिहाबाद में आम के बागों के गैप प्रमाणीकरण में दे रहा मदद

foundation day 1लखनऊ: आईसीएआर-सीआईएस रहमानखेड़ा, लखनऊ ने अपना 36वा स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया.  इस कार्यक्रम के दौरान “आम में आदर्श कृषि क्रियाओं  के अनुपालन एवं फल उत्पादक संगठन” से प्राप्त लाभ के द्वारा  उत्पादकों,  किसानों,  उधमियों, बैंकर्स एवं उद्यान अधिकारी ने भाग लिया. मुख्य अतिथि मंडी परिषद के निदेशक रमापति पांडे ने मंडी परिषद द्वारा किसानों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में अवगत कराया और छोटे  किसानों को अपने उत्पाद को एकत्रित करके अधिक मात्रा में सप्लाई करने में होने वाले लाभ के बारे में भी उदाहरण सहित  समझाया. राजेश कुमार यादव (सहायक महाप्रबंधक नाबार्ड) ने आम के बागवानो  के लिए फार्मर्स प्रोडूसर कंपनी बनाए जाने हेतु विभिन्न  उत्पादों की जानकारी दी गई.

36वा स्थापना दिवस समारोह: आम उत्पादकों को मिले कई टिप्स

मुख्य अतिथि ने कहा कि आम के व्यवसाय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए किसानों के गैप प्रमाणीकरण का ज्ञान आवश्यक हो गया है. वैसेfoundation day ही मलिहाबाद के किसानों को अन्य कई आम उत्पादक प्रदेशो के मुकाबले आम का कम दाम मिल पाता है परंतु भविष्य में आने वाली चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए बागवानो को इन मुद्दों  की कसौटी पर खरा उतरने की आवश्यकता है. विदेशों से आने वाले  निर्यातक  भी  गैप प्रमाणीकरण की आवश्यकता पर जोर देते है परंतु  अपने देश में भी इस प्रकार के प्रमाणीकरण की आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि आम का बाजार अभी असंगठित है और किसान से खरीदार तक कई लोगों के सम्मिलित होने के कारण बहुत से मुख्य बिंदु (जो भविष्य में आवश्यक प्रतीत होते हैं) भुला दिए जाते हैं. देश में ग्राहकों की अच्छी क्रय शक्ति होने के कारण प्रमाणित आमों को खरीदने के लिए वे कई गुना दाम देने में नहीं  हिचकते हैं.

आम के बागों का गैप प्रमाणीकरण एक आवशकता

नाबार्ड की सहायता से किसान आम उत्पादक संगठन विकसित करने की आवश्यकता है. संस्थान इसके लिए प्रयासरत है क्योंकि शिक्षित किसानों और बेरोजगार ग्रामीण युवाओं की नई पीढ़ी के पास उद्यमी बनने और बागवानी को व्यवसाय उद्यम के रूप में अपनाने का विशेष अवसर है. एक किसान केवल नई कृषि तकनीक अपनाने से ही उद्यमी नहीं बन जाता है बल्कि यह तभी संभव होगा जब वह कृषि व्यवसाय का स्वंसंचालक बनता है. किसान आम उत्पादक संगठन (एफपीओ) उद्यमियों को लाभ में वृद्धि करके भूमिका निभा सकता है. एफपीओ के माध्यम से बिचौलियों की संख्या कम करके उत्पादन की लगत कम की सकती है और सीधे उपभोक्ताओं या कंपनी को बेच आम बेचे जा सकते है. एफपीओ को तकनीकी के लिए संस्थान द्वारा समर्थित किया जा सकता है. नाबार्ड से राजेश कुमार यादव ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी. आम उत्पादक एवं   बागवानी संबंध समिति के भूपेंद्र सिंह  ने समिति  के सदस्यों द्वारा गैप  की आवश्यकताओं के अनुरूप करने के लिए किसानों को संगठित होकर कार्य करने की  सलाह दी क्योंकि आने वाले समय में यह आम के व्यापार का एक मुख्य मुद्दा बनने जा रहा है.

गैप प्रमाणीकरण को आवश्यक शर्त के रूप में निर्यातकों ने लागू करना किया शुरू

निर्यातकों ने गैप प्रमाणीकरण को आवश्यक शर्त के रूप में लागू करना प्रारंभ कर दिया है क्योंकि  अंतरराष्ट्रीय बाजार में उन्हें वह सभी सूचनाएं देनी आवश्यक हैं और आम व्यवसाई आज तक इन पर ध्यान नहीं दे पाए. संसथान से  व्यापारियों एवं बड़े किसानों ने इस प्रकार के प्रमाणीकरण के लिए सहायता हेतु विचार विमर्श करते हें क्योंकि वे अपने आम को अधिक मूल्य पर बेचने के लिए इसका उपयोग करना चाहते हैं. अच्छी क्वालिटी के साथ-साथ प्रमाणीकरण  आम का अच्छा दाम दिलाने में सहायक है. विदेशों में ग्राहक को फल से संबंधित सारी जानकारी खरीदते समय उपलब्ध हो जाती है.  धीरे धीरे यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग बन गई  है और मलिहाबाद के किसानों को  गुणवत्ता युक्त उत्पादन के साथ-साथ के प्रमाणीकरण की भी आवश्यकता पड़ेगी.

ICAR-CISH ने आम के लिए गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (गैप) दिशा-निर्देश बनाये

ICAR-CISH ने आम के लिए गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (गैप) दिशा-निर्देश विकसित की गई  हैं और आम मालिहाबाद बागों के प्रमाणन में मदद करने का प्रस्ताव किया है. गैप प्रमाणीकरण ज्यादातर निर्यातकों द्वारा प्रेरित किया जाता है, लेकिन आम उपभोक्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को भी इस मुद्दे पर दिलचस्पी होगी और अंततः उत्पादक को लाभ होगा. इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में गैप प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी आवश्यकताएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. प्रमाणन कार्यक्रम उपभोक्ता के लाभ के लिए भी है. कार्बाइड और गैरवाजिब रसायनों के उपयोग से मुक्त होने के कारण प्रमाणित आम को अधिक मांग होगी. किसान आम के ब्रांडिंग भी कर सकते हैं, जिसके के लिए फार्मर्स मैंगो प्रोड्यूसर कंपनी बड़े पैमाने पर मदद कर सकती है. निश्चित रूप से फलों की कीमत में मांग और वृद्धि गैप आवश्यकताओं के पालन के लिए लागत की भरपाई करेगी.

प्रमाणन से न केवल गुणवत्ता और अन्य मुद्दों में मदद मिल सकती है, बल्कि आम के पेड़ों की पैदावार में भी निश्चित रूप से सुधार होगा. वर्तमान समय की समस्याएं जो कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग के कारन हैं उनकी  संख्या भी कम हो जाएगी.
इस कार्यक्रम के संतोषजनक कार्यान्वयन में कुछ साल लग सकते हैं, लेकिन निकट भविष्य में आम उद्योग की स्थिरता के लिए प्रदेश और विशेष रूप से मलिहाबाद की यह मुख्य आवश्यकता प्रतीत होता  है. हालाँकि, प्रमाणन एजेंसियां भारत में उपलब्ध हैं, लेकिन उनके द्वारा मांगे गए शुल्क को मलीहाबाद के किसानों द्वारा वहन नहीं किया जा सकता है. प्रमाणन शुल्क के रूप में कई लाख रुपये संसाधन हीन गरीब किसान द्वारा चुकाना मुश्किल है, इसलिए, हमें वैकल्पिक प्रमाणीकरण कार्यक्रम के बारे में सोचना होगा जो गुणवत्ता और फल की गुणवत्ता को सुनिश्चित कर सकता है. आईसीएआर-सीआईएस स्वीकार्य मैंगो गैप प्रमाणन कार्यक्रम के लिए प्रयासरत है.

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