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परजीवी पौधों के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न करने में क्रियाशील जीन की पहचान से मिलेगी मदद 

DSC_6314DSC_3792लखनऊ:  परजीवी पौधे द्वारा किसी पौधे पर आक्रमण के समय जो जीन क्रियाशील होते हैं. उनकी पहचान से भविष्य में पौधों में परजीवी पौधों के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न करने में सहायता प्राप्त होगी. यह बात नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) और इंडियन सोसाइटी ऑफ प्लांट फिजियोलॉजी (आईपीपीसी) द्वारा आयोजित चौथी इंटरनेशनल प्लांट फिजियोलॉजी कांग्रेस (आईपीपीसी)-2018 के चौथे दिन विशिष्ट व्याख्यानों में कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय, अमेरिका की डॉनीलिमा सिन्हा ने कही.

इंटरनेशनल प्लांट फिजियोलॉजी कांग्रेस के समापन समारोह में युवा वैज्ञानिक किये सम्मानित

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान  में आयोजित इस कांग्रेस के अंतिम दिन डॉनीलिमा सिन्हा ने अमरबेल पौधे (कस्कुटा) एवं इससे प्रभावित होने वाले पौधों के परस्पर संबंधों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि अमरबेल एक परजीवी पौधा है जो विभिन्न पौधों को नुक्सान पहुंचाता है जिसमें फसलें भी शामिल हैं. ऐसे में टमाटर के पौधे पर किये गए अपने कार्य से उन जीनों को पहचानने की कोशिश की जो इस परजीवी पौधे द्वारा किसी पौधे पर आक्रमण के समय क्रियाशील होते हैं. ऐसे जीनो की पहचान से पौधों में प्रतिरोधकता उत्पन्न करने से फसल उत्पादकता भी बढ़ायी जा सकेगी. दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ अखिलेश त्यागी ने धान के पौधों में विकास की अवस्था के दौरान जीनों की क्रियाओं जैसे “नर बंध्यता एवं बीजों के विकास से जुड़े हुए जीन” का विश्लेषण प्रस्तुत किया.
इसके साथ फ्रांस के टैन्गाई लाफार्ज ने उत्पादकता में वृद्धि हेतु पौधों में बनने वाले भोज्य पदार्थों के भंडारण, वितरण एवं प्रयोग के नियंत्रण पर चर्चा की जिससेअनाज के दानों की अधिक संख्या में उत्पादन के साथ उनमें अधिक भोज्य पदार्थ संग्रह सुनिश्चित करने की दिशा में सफलता प्राप्त हो सके. एनबीआरआई के डॉ पीके सिंह ने पौधों में आनुवंशिक सुधार हेतु अपुष्पी पौधों से नवीन कीटनाशक प्रोटीनों की खोज की दिशा में सफ़ेद मक्खी प्रतिरोधी कपास के विकास पर किये गए शोध को प्रस्तुत किया. इसी के साथ एक विशेष पैनल सत्र भी हुआ  जिसमें पादप उत्पादकता बढ़ने हेतु जैवप्रौद्योगिकी उपायों पर चर्चा की गयी. इस सत्र में पद्मश्री डॉ अजय परीदा, प्रो उतेहोकर, डॉ आसफ आहरोनी, डॉ पीवी साने, डॉ पी के घोष, प्रो अखिलेश त्यागी एवं डॉ पीके सिंह पैनल में मौजूद रहे.

डॉ रिधि दत्ता, डॉ मो इकबाल रजा खान और डॉ वेदा कृष्णा युवा वैज्ञानिक सत्र में सर्वश्रेष्ट प्रस्तुति के लिए सम्मानित

(आईपीपीसी)-2018 के अंतिम दिन  3 विशिष्ट व्याख्यान, 2 मुख्य व्याख्यान एवं 12सत्र व्याख्यान प्रस्तुत किये. इसके साथ समापन समारोह में पोस्टर सत्र एवं युवा वैज्ञानिक सत्र के विजेताओं को पुरुस्कृत किया गया. समापन समारोह में कार्यक्रम की सहसंयोजक डॉ विधू साने ने संगोष्ठी का सारांश प्रस्तुत किया. विभिन्न सत्रों में सर्वश्रेष्ट पोस्टर प्रस्तुति के लिए 10 शोधार्थियों को एवं युवा वैज्ञानिक सत्र में सर्वश्रेष्ट प्रस्तुति के लिए डॉ रिधि दत्ता (आईआईसीबी, कोलकाता) डॉ मो इकबाल रजा खान (जामिया मिलिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), डॉ वेदा कृष्णा (आईएआरआई, नई दिल्ली को क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया. अंत में संयोजक डॉ प्रबोध त्रिवेदी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया.

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