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विदेशी कोचों के पीछे चाहे जितना भागो लेकिन भारतीय कोच ही बेस्टः धनराज पिल्लै

cलखनऊ। आप चाहे विदेशी कोचों के पीछे चाहे जितना ही भाग लो लेकिन आपको बेहतर परिणाम और बेस्ट प्रशिक्षण चाहिए तो वह भारतीय कोच ही दे सकते है। यह बात 35वीं वाहिनी पीएसी के सिंथेटिक एथलेटिक्स स्टेडियम में आयोजित द्वितीय इंटर जयपुरिया स्पोर्ट्स मीट पिनेकल-2018 में बतौर खिलाड़ियों के उत्साहवर्द्धन के लिए मौजूद भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै ने कही। इस दौरान उनके साथ पूर्व इंटरनेशनल निशानेबाज जसपाल राणा भी मौजूद थे।

सेमीफाइनल तक का सफर तय करेगी भारतीय टीम

धनराज ने भुवनेश्वर में शुरू हुए सीनियर हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की पहले मैच में 5-0 से जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय टीम बेल्जियम के खिलापफ अपने अगले मैच में भी शानदार जीत दर्ज करेगी। मेरी निगाह में सेमीफाइनल तक हमें आसान जीत मिल सकती है।

अब टोटल हॉकी का दौर, खिलाड़ी को सभी पोजीशन में होना पड़ता है पारंगत

धनराज ने इसी के साथ अपने समय की और वर्तमान हॉकी में अंतर का जिक्र करते हुए कहा कि अब सभी खिलाड़ियों को सभी पोजीशन पर खेलना पड़ता है। अगर डिफेंस में खेलते है तो फारवर्ड लाइन पर जाकर आक्रमण करना यानि टोटल हॉकी खेलनी पड़ती है जबकि हमारे समय में टीम में फारवर्ड और डिफेंस में खिलाड़ियों की भूमिका तय होती थी।

लैपटाप हॉकी का अंधानुकरण ठीक नहीं, तय हो सीमा रेखा

aउन्होंने इसके साथ ही अपने पुराने लैपटॉप वाली हॉकी के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यूरोपियन देशों को अगर मात देना है तो हमें लैपटॉप वाली हॉकी को अपनाना चाहिए लेकिन इस पर कितना डिपेंड करना होगा, उसकी सीमा तय करनी होगी। हालांकि लैपटाप से कई चीजों की बेहतर सीख मिलती है लेकिन वह एक सीमा तक ही ठीक है। जहां तक मेरी बात है तो मैने फील्ड हॉकी से ही परफार्मेंस देते हुए ही 12 साल तक ही अपने खेल का दुनिया में लोहा बनवाया है। यहीं नहीं मुकाबलों के बाद विदेशी खिलाड़ी मेरे पास आकर हॉकी स्टिक भी चेक करते थे।

1994 में पांचवें नम्बर पर, अभी भी पांचवे नम्बर पर तो फिर विदेशी कोच का क्या फायदा

धनराज ने विदेशी कोचो की तुलना में भारतीय कोचों को सर्वश्रेष्ठ कहते हुए यह कहा कि दादा ध्यान चंद, केडी सिंह बाबू, जमनलाल शर्मा, परगट सिंह और मो. शाहिद सभी ने भारतीय कोचेज से ट्रेनिंग लेकर पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाया हैं। मेरी निगाह में भारतीय कोच ही सर्वश्रेष्ठ है और पूरी दुनिया में वहीं सबसे बेहतर है क्योंकि विदेशी कोचों के साथ भाषाई दिक्कत के चलते सामंजस्य बिठाने में दिक्कत हो सकती हैं।

सिर्फ पैसों पर रहती है विदेशी कोचों की निगाह

इसका परिणाम आप देखिए कि भारतीय कोच हरेंद्र सिंह ने अपनी कोचिंग में भारत को विश्वकप जूनियर हॉकी टूर्नामेंट-2018 में विश्व विजेता बनवाया था। उन्होंने कहा कि 1994 में टीम इंडिया पांचवें स्थान पर थी और अभी भी टीम इंडिया पांचवें स्थान पर है तो फिर विदेशी कोच होने का क्या फायदा। विदेशी कोच तो सिर्फ पैसा बटोरने आते है।

हरेंद्र सिंह ने जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में दिया बेहतर परिणाम, अब फिर देंगे

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भुवनेश्वर में हो रहे सीनियर हॉकी विश्वकप में भी हरेंद्र सिंह ही टीम कोच है और मुझे उनसे बेहतर परिणाम की उम्मीद है और मेरी निगाह में सेमीफाइनल तक हमें आसान जीत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय खिलाड़ी अभी फार्म में है और हमारे साथ सबसे बड़ा फायदा मेजबानी का यह मिला है कि जिस टर्फ पर मुकाबले हो रहे हैं। उस पर भारतीय टीम ने पिछले ढाई महीने पसीना बहाकर अभ्यास किया हैं। वहीं इस टीम के साथ जूनियर वर्ल्ड कप दिलाने वाले कोच हरेंद्र सिंह का साथ होना सोने पर सुहागे जैसा है। वैसे भी टीम में शामिल सभी खिलाड़ी दमदार प्रदर्शन कर रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि हॉकी इंडिया लीग से खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से काफी फायदा हुआ है और उम्मीद है कि व्यस्त इंटरनेशनल प्रोग्राम के चलते टला हॉकी इंडिया लीग का आयोजन अगले साल हो सकेगा।

देश में काफी प्रतिभाशाली जूनियर निशानेबाजः जसपाल

पूर्व इंटरनेशनल शूटर जसपाल राणा ने कहा कि भारत में मनु भाकर ही नहीं अनीश, सौरभ चौधरी जैसे कई बढ़िया शूटर है लेकिन हमें पदक जीतने में निशानेबाजों की मेहनत को भी समझना होगा। उन्होंने यूपी में कम प्राइजमनी का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर सौरभ चौधरी हरियाणा का होता तो उसे दो करोड़ मिलते लेकिन यूपी में सौरभ चौधरी और उस जैसे ही अन्य खिलाड़ियोंको मात्र 50 लाख दिए जा रहे है। उन्होंने कहा कि यूपी में मिल रही प्राइजमनी अन्य राज्यों की तुलना में कापफी कम है।

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