July 25, 2021

एम्स की स्टडी : डेल्टा वैरिएंट से वैक्सीन की डोज लेने के बाद भी हो सकते है संक्रमित 

प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया

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नई दिल्ली : भारत में फ़ैल रहे कोरोना संक्रमण के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है. इस बीच एम्स (दिल्ली) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की अलग-अलग  स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना का डेल्टा वैरिएंट (पिछले वर्ष अक्टूबर में पहली बार भारत में मिला) कोवैक्सिन या कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी लोगों को संक्रमित कर सकता है.

वैसे अभी किसी स्टडी की सहकर्मी-समीक्षा नहीं हुई है. इस बारे में एम्स  की स्टडी के अनुसार  ‘डेल्टा’ वैरिएंट  ‘अल्फा’ वैरिएंट  की तुलना में 40 से 50  फीसदी से ज्यादा संक्रामक है.

प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया
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एम्स-आईजीआईबी (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) की स्टडी  63 रोगसूचक रोगियों के विश्लेषण पर आधारित था, जिनको अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में पांच से सात दिनों तक तेज बुखार की शिकायत थी.  इन 63 में से 53 को कोवैक्सिन की कम से कम एक डोज व अन्य को कोविशील्ड की कम से कम एक डोज मिली थी. वही 36 को इनमें से एक वैक्सीन की दोनों डोज मिली थीं.

डेल्टा’ वैरिएंट का 76.9  फीसदी संक्रमण उन लोगों में मिला जिन्हें एक डोज मिली थी. इसके साथ 60 फीसदी केस उन लोगों में मिले थे जिन्होंने दोनों डोज ली थी. इसके अलावा एनसीडीसी-आईजीआईबी स्टडी के आंकड़ों के अनुसार ‘डेल्टा’ वैरिएंट का संक्रमण कोविशील्ड लेने वाले लोगों को प्रभावित करता है.

इन दोनों स्टडी से ये भी संकेत मिला कि ‘अल्फा’ वैरिएंट भी कोविशील्ड और कोवैक्सिन के लिए प्रतिरोधी हो रहा है, लेकिन उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि भारत से पहली बार रिपोर्ट किया गया संस्करण रहा है.।दोनों स्टडी के अनुसार  वैक्सीन की ‘डेल्टा’ और यहां तक ​​कि ‘अल्फा’ से सुरक्षा कम हो सकती है, इसके चलते  प्रत्येक मामले में संक्रमण की गंभीरता अप्रभावित दिखी है.

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ये यह वैज्ञानिकों के उन विचारों के अनुकूल है  कि अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ‘डेल्टा’ वैरिएंट  कोविड से जुड़ी मौतों या अधिक गंभीर संक्रमणों की ज्यादा संख्या का जिम्मेदार  है. वैसे एम्स-आईजीआईबी और एनसीडीसी-आईजीआईबी की स्टडी से पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, आईसीएमआर और कोवैक्सिन निर्माताओं भारत बायोटेक की संयुक्त जांच का खंडन होता है.

इस स्टडी से ये भी संकेत मिलता है कि कोवैक्सिन ‘डेल्टा’ और ‘बीटा’ दोनों वैरिएंट के खिलाफ सुरक्षा डेटा है. ‘बीटा’ वैरिएंट सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में मिला था.

बताते चले कि पिछले हफ्ते  एक सरकारी वैज्ञानिक स्टडी के अनुसार  भारत में कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार ‘डेल्टा’ वैरिएंट  था. वही लहर के पीक पर रोज  चार लाख से अधिक नए केस मिले है. वही विशेषज्ञों ने सरकार से संक्रमण की तीसरी लहर के अंदेशे को देखते हुए देश में वैक्सीनेशन की गति बढ़ाने को कहा था. वैसे देश में अब तक  लगभग 24 करोड़ डोज दी जा चुकी है.


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