July 28, 2021

तमाम विज्ञानी समझ चुके हैं योग की ताकत : डाॅ.सोनू गुप्ता

डाॅ.सोनू गुप्ता

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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में अपनो को खोने के कारण अधिकांश परिवारों में केाई न कोई मनोरोगी पैदा हो रहा है। ऐसे लोग अवसाद, ब्लडप्रेशर, शुगर, अनिद्रा व नशे के शिकार हो रहे हैं. यदि हम योगाभ्यास नियमित रूप से करें तो आने वाली तीसरी लहर से हम स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं.

ये बात सन्त विरागी बाबा महाविद्यालय, घाटमपुर, (कानपुर नगर) की समाजशास्त्र प्रवक्ता डाॅ.सोनू गुप्ता ने बोली.  कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के दुष्प्रभाव ने यह बात साबित की है कि यह संक्रमण अत्यधिक घातक है. एक तरफ अपनो की सेहत की फिक्र और दूसरी तरफ मजबूत इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण का खतरा, हमें और भी झकझोर देता है.

डाॅ.सोनू गुप्ता

ऐसे समय में हमें स्वयं का और अपने परिवार का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है ताकि आने वाले समय में कोरोना की तीसरी लहर के प्रभाव से हम अपनी और अपनों की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा कर सकें.

हमारे पूर्वजों के द्वारा सुझाए योग और आयुर्वेद को अपनाकर हमने बीते वर्ष कोरोना संक्रमण की पहली लहर को पछाड़ दिया था. इसलिये हमें योग से मिल रहे हौसले को बरकरार रखना चाहिए। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मौजूद तमाम विज्ञानी योग की ताकत को समझ चुके हैं.

अगर आप कोरोना संक्रमण से ग्रस्त हैं और नियमित रूप से ब्रीदिंग एक्सरसाइज करते हैं तो संक्रमण के उपचार में भी आसानी होती है. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में अपने को समायोजित करने के लिये यह आवश्यक है कि वह शारीरिक और मानसिक दृष्टि से पूरी तरह से स्वस्थ हो। योग के द्वारा मन की चंचलता और समस्त इन्द्रियों पर विजय पायी जा सकती है.

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योग, एकाग्रता तथा आत्मिक ज्ञान के विकास में सहायक है. योग के माध्यम से हम अपने कार्य को कुशलता के साथ सम्पन्न कर सकते हैं. आज कल की व्यस्त जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण योग मानव जीवन के लिये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.  योग क्रियाओं के नियमित अभ्यास से बहुत आसानी से शारीरिक और मानसिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है.

योंग मानवीय समस्याओं से जुड़ी हुई मानसिक समस्याओं को दूर करने में मद्दगार सिद्ध हो रहा है. सिर्फ इतना ही नहीं योग व्यक्तित्व के विकाश में महत्वपूर्ण प्रासंगिकता के वजूद का एहसास दिला रहा है. योग न केवल रोगों के उपचार में सहायक है बल्कि व्यक्तियों के अन्दर इस सामथ्र्य को विकसित करने और बरकरार रखने में भी सहायक है.

जिससे वह निरोग रहते हुये जीवन व्यतीत कर सकता है ‘योग‘ मनुष्य केा इस तरह तैयार करता है कि वह आगे रोग ग्रस्त न हो सके. आर्ट  ऑफ़ लिविंग के प्रेणता श्री श्री रविशंकर के अनुसार हम पर्याप्त नींद लें, व्यायाम करें, ध्यान करें. तनाव, घबराहट और चिंता प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने के लिये जाने जाते हैं.

आसन, प्राणायाम और ध्यान को दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बनाने से न केवल किसी का शारीरिक रसायन बदल सकता है बल्कि यह दिमाग को शांत, लचीला और केन्द्रित बनाता है, चाहे जो हो, हमें रोज ध्यान करने की आवश्यकता है.

कोरोना महामारी से बचाव के लिये योग गुरू बाबा रामदेव का मानना है कि नियमित रूप से भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, ओमकारनाथ प्राणायाम के द्वारा हम शरीर के महत्वपूर्ण अंग फेफड़े, हृदय पेनक्रियाज को मजबूत कर सकते हैं और अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं. सूर्य नमस्कार के द्वारा स्वस्थ व्यक्ति भी अपने शरीर को मजबूत बना सकते हैं.


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