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Careful : ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में नींद में ही रुक जाती है सांस, हो सकता है जानलेवा

apniaलखनऊ: ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जो देखने में भले ही खास न लगे लेकिन अगर ध्यान न दे तो ये जानलेवा हो सकती है. इस बीमारी में नींद के दौरान सांस रुकने से शरीर के विभिन्न अंगो में आक्सीजन की कमी से मरीज की जान भी जा सकती है. ये जानकारी डेट हुए डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी (एमडी एमबीबीएस, प्रोफेसर और श्वसन चिकित्सा विभाग, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के प्रमुख) ने बताया कि देश में 30 साल से ऊपर के 40 फीसदी लोग खर्राटा लेने की समस्या से पीड़ित है जबकि इससे उपजी दिक्कतों के चलते देश के 18 फीसदी लोग स्लीप एपनिया की बीमारी से पीड़ित है जबकि पूरे विश्व में इस बीमारी से पीड़ित लोगो को संख्या 90 फीसदी है.

बार-बार जोर से खर्राटे लेना इस बीमारी के होने का हो सकता है संकेत, देश की 18 फीसदी आबादी है पीड़ित

Suryakantडॉ. सूर्यकांत ने आगे बताया कि जब तक आपका बेड पार्टनर आपको गहरी नींद में बाधा नहीं डाल रहा लेकिन बार-बार जोर से खर्राटे लेना स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता हैं . डॉ सूर्यकांत त्रिपाठी स्लीप एपनिया को एक आम और संभावित रूप से गंभीर विकार के रूप में बताते हैं जिसमें बार-बार सांस लेना बंद हो जाता हैं और यह आपके सोते ही शुरू हो जाते हैं. हालांकि स्लीप एपनिया उपचार योग्य हैं परन्तु यह अक्सर ही अनदेखा रह जाता है. चेतावनी के संकेतों की पहचान करना व यह सामान्य खर्राटों से कैसे अलग हैं , यह सीखना, स्लीप एपनिया पर काबू और रात की अच्छी नींद पाने के लिए पहला कदम हैं.

नींद में तीन मिनट से ज्यादा सांस रुकना हो सकता है जानलेवा

डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने आगे बताया कि स्लीप एपनिया आपके सोने के तरीके को प्रभावित करता हैं. अनुपचारित स्लीप एपनिया में, सोते समय सांस लेते समय सांस थोड़ी देर के लिए रुक जाती हैं. ये साँस रुकना आमतौर पर 10 से 20 सेकंड के लिए होता हैं और रात में सैकड़ों बार हो सकता हैं, जो आपको आपकी प्राकृतिक नींद की लय से अलग कर देता हैं जबकि अगर ऐसा तीन मिनट से ज्यादा होगा तो आपके लिए जानलेवा भी हो सकता है. उन्होंने कहा की आराम की कमी से या रात में कम नींद के चलते हमें दिन में ज्यादा नींद आती हैं वो खराब एकाग्रता और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा देती हैं. स्लीप एपनिया समय के साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दे सकता हैं, जिसमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक और वजन बढ़ना शामिल हैं लेकिन उपचार से आप इन लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता हैं और आप अपनी नींद को वापस पा सकते हैं और हर दिन ताज़ा और सतर्क रहने का आनंद लेना शुरू कर सकते हैं.

खर्राटे से होने वाली बीमारियों के बारे में बताती है किताब “खर्राटे है खतरनाक”

Suryakant11इस दौरान डॉ. सूर्यकांत ने खर्राटे से होने वाली बीमारियों के खतरों पर लिखी एक किताब “खर्राटे है खतरनाक” किताब के बारे में भी बताया जिसको पढ़ कर एक आम आदमी भी अपने हेल्थ के प्रति सचेत हो सकता है. ये किताब डॉ. सूर्यकांत और डॉ. अभिषेक दुबे ने लिखी है और इसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने प्रकाशित किया है और ये किताब संस्थान के हजरतगंज ऑफिस पर उपलब्ध है.

स्लीप एपनिया के प्रकार:

  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया: यह स्लीप एपनिया का सबसे सामान्य प्रकार हैं जो तब होता है जब नींद में गले की मांसपेशियों की शिथिलता के चलते श्वसनमार्ग के आंशिकयापूर्ण रूप से अवरुद्ध होने लगता हैं,जिससे अक्सर आप जोर से खर्राटे लेते हैं.
  • सेंट्रल स्लीप एपनिया: इसमें सेंट्रल नर्वस सिस्टम शामिल होता हैं , जब मस्तिष्क सांस लेने को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को संकेत देने में विफल रहता हैं. सेंट्रल स्लीप एपनिया से ग्रस्त लोग खर्राटे लेते हैं.
  • कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया : ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सेंट्रल स्लीप एपनिया का संयोजन हैं.

स्लीप एपनिया के होने के कारण :

स्लीप एपनिया में सोने के दौरान एयरफ्लो रुक जाता हैं, जिससे आपके रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता हैं। आपका मस्तिष्क आपकी नींद में खलल डालकर प्रतिक्रिया करता हैं कि आप सांस लेना शुरू करें – जो अक्सर हांफने या घुटन भरी आवाज के रूप में सामने आता हैं. यदि आपको स्लीप एपनिया हैं, तो आपको शायद ये सब सुबह याद भी नहीं होता होगा, अधिकांश समय  आप केवल अपने गले की मांसपेशियों को कसने के लिए और अपने विंडपाइप को खोलने के लिए रात भर पर्याप्त हलचल करते रहेंगे . सेंट्रल स्लीप एपनिया में आप जागने के प्रति सचेत हो सकते हैं.

स्लीप एपनिया के लक्षण:

  • epniaइसकी अपने आप पहचान करना सबसे कठिन हो सकता हैं क्योंकि सबसे प्रमुख लक्षण केवल तब होते हैं जब आप सो रहे होते हैं. आप अपनी नींद की आदतों के बारे में अपने पार्टनर से पूछ सकते हैं या नींद के दौरान खुद को रिकॉर्ड करके इस कठिनाई के आसपास पहुँच सकते हैं.
  • यदि आप खर्राटे लेते समय रुक जाते हैं, और अगर  हांफते हैं, तो ये प्रमुख संकेत हैं कि आपको स्लीप एपनिया हैं.
  • एक और सामान्य संकेत दिन के दौरान, काम पर या ड्राइविंग करते समय नींद आना भी हैं जब आपकी रात में नींद पूरी न होती हो पूरे समय सोने के बाद भी.

अन्य सामान्य लक्षण: सुबह का सिरदर्द, ध्यान केंद्रित न कर पाना, चिड़चिड़ापन, उदास महसूस करना या मिजाज या व्यक्तित्व में बदलाव आना, पेशाब करने के लिए बार-बार उठना, जब आप उठते हैं तो मुंह या गले में खराश होना

किसी भी उम्र में, बच्चों को भी प्रभावित कर सकता हैं लेकिन इनको ज्यादा खतरा:  नर होना, अधिक वजन होना, 40 वर्ष से अधिक आयु होना, बड़े गर्दन का आकार (पुरुषों में 17 इंच या उससे अधिक और महिलाओं में 16 इंच या उससे अधिक), बड़ी टॉन्सिल, बड़ी जीभ या छोटी जबड़े की हड्डी, पारिवारिक इतिहास होना, गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स या जीईआरडी, एलर्जी या साइनस की समस्याओं के कारण नाक में रुकावट

ये हो सकती है दिक्कते (समय पर इलाज न होने पर) : उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, अनियमित दिल की धड़कन, और दिल का दौरा, मधुमेह, अवसाद, एडीएचडी का बिगड़ जाना, सिरदर्द, रोज़मर्रा की गतिविधियों में खराब प्रदर्शन जैसे-काम या स्कूल, मोटर वाहन दुर्घटनाएं, और बच्चों और किशोरों में अकादमिक कमज़ोरी का खतरा.

इलाज के लिए सीपीएपी

cpapनिरंतर सकारात्मक वायुप्रवाह दबाव (AUTO CPAP) : मध्यम से गंभीर अवरोधक स्लीप एपनिया के लिए सबसे आम उपचार हैं. कई मामलों में आप तत्काल लक्षण राहत और अपनी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा में भारी वृद्धि का अनुभव करेंगे. ये डिवाइस एक मुखौटा जैसी मशीन हैं जो हवा की एक निरंतर धारा प्रदान करती हैं जो आपके सोते समय आपके श्वास मार्ग को खुला रखती हैं. अधिकांश उपकरण एक बॉक्स के आकार के होते हैं. ये तकनीक लगातार अपडेट और बेहतर हो रही हैं, और नए डिवाइस हल्के, शांत और अधिक आरामदायक हैं.

मेंडीबुलर एडवांसमेंट डिवाइस: ये सोते समय जबड़े को पीछे जाने से रोकती है क्योकि सोते समय जबड़ा पीछे जाने से भी सांस रुक जाती है. ये डिवाइस काफी सस्ती है और आम आदमी भी इसको इस्तेमाल कर सकता है. इस डिवाइस का यूएस पेटेंट डॉ. सूर्यकांत और डॉ. अरविन्द त्रिपाठी के पास है.

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