July 24, 2021

डेल्टा प्लस काफी ज्यादा संक्रामक, नए कोरोना वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन इतनी असरदार 

फाइल फोटो सोशल मीडिया

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कोरोना वायरस से पूरी दुनिया का बुरा हाल है. वही रोज मिल रहे नए  वेरिएंट चिंता बढ़ा रहे है. इस बीच् कोरोना का डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरिएंट दहशत का सबब बन गया है.इस वेरिएंट के बारे में एक नयी स्टडी के अनुसार  डेल्टा प्लस में हुए म्यूटेशन से इसकी संक्रामकता और बढ़ सकती है. इसके साथ  शुरुआती कोरोना वायरस से डेल्टा वेरिएंट लगभग  172 फीसदी अधिक संक्रामक है.

वैसे डेल्टा प्लस पर चल रहे शोध में आंकलन है कि इसमें हुआ नया म्यूटेशन के417एन  पहले दक्षिण अफ्रीका में मिले बीटा वेरिएंट में भी था और कहा जा रहा है कि इस म्यूटेशन मानव शरीर में उत्पन्न एंटीबॉडी के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता मिल सकती है.

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वैश्विक एजेंसी जीआईएसएआईडी ने अब तक डेल्टा प्लस के 166 जीनोम सिक्वेंसिंग की स्टडी के आधार पर दावा किया कि इसके अधिक संक्रामक या भयावह होने का कोई तथ्य नहीं है.  वही  वैज्ञानिक समुदाय इससे खुश  नहीं है,  शोधकर्ताओं की माने तो नया म्यूटेशन के417एन इम्यून इस्केप एवं स्पाइक प्रोटीन के रिसीप्टर बाइंडिग डोमेन से जुड़ा है.

यानि इससे संक्रमित होने का अधिक खतरा होता है और ये एंटीबॉडी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता भी बना लेता है.  नेचर में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार डेल्टा वेरिएंट अल्फा से 60 फीसदी अधिक संक्रामक है. पहली बार यूके में मिले अल्फा वेरिएंट को यूके में दूसरी लहर का जिम्मेदार कहा जाता है.

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अल्फा वेरिएंट शुरुआती कोरोना वायरस की तुलना में 70 फीसदी अधिक सक्रामक था जबकि  डेल्टा वेरिएंट  जो 90 से अधिक देशों में फ़ैल चूका है और संक्रमण का बड़ा कारण है, को शुरुआती वायरस की तुलना में 172 फीसदी अधिक संक्रामक हो चुका है। अभी 90 से अधिक देशों में इसका प्रसार है तथा संक्रमण में सर्वाधिक भूमिका बताया गया है.

दूसरी  ओर अमेरिका में हुई स्टडी के अनुसार नेचर का आंकलन है कि  डेल्टा वेरिएंट पर वैक्सीन असरदार है लेकिन थोड़ा कम है. पब्लिक हेल्थ इग्लैंड की स्टडी के अनुसार नए  वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन को दोनों डोज असरदार होती है. इसके साथ दूसरी वैक्सीन पर भी स्टडी चल रही है और संकेत के अनुसार दूसरी वैक्सीन भी थोड़ा कम असर करेगी.

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इसके अलावा एस्ट्राजेनेका और फाइजर की एक डोज लेने वालो में  डेल्टा वायरस के संक्रमण से  सिर्फ 33 फीसदी ही बचाव देता है या खतरा 33 फीसदी कम होता है.इसके साथ अल्फा वेरिएंट से 50 फीसदी बचाव मिलता है.

वही एस्ट्राजेनेका की दो डोज लेने के बाद डेल्टा के खिलाफ  60 फीसदी और अल्फा के  खिलाफ 66 फीसदी सुरक्षा मिलती है. वही फाइजर की दोनों डोज लेने के बाद डेल्टा के खिलाफ 88 फीसदी और अल्फा के खिलाफ 93 फीसदी सुरक्षा मिलती है.


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