July 29, 2021

धोनी की कप्तानी शानदार, देश-विदेश में था क्रिकेटर का जलवा

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पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में कप्तानी शानदार रही है और दबाव में उनका खेल और शानदार हो जाता है. देश-विदेश में उनके खेल का जलवा देखने को मिलता था.

जब वो शिखर पर थे तो उनकी बात भारत ही नहीं विदेशों में होती थी. उनकी कप्तानी में भी रिकॉर्ड पुरुष सचिन का सपना भी सच हो गया. भारतीय टीम ने 1983 के बाद वर्ल्ड कप उनकी कप्तानी में जीता है.

बुधवार को अपना 40वां बर्थडे मना रहे धोनी के जीवन पर एक बायोपिक भी बनी है. भारत को अपनी कप्तानी में दो विश्व कप और तीन आईसीसी जिताने वाले पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी को बीसीसीआई शानदार विदाई नहीं दे पाया. महेंद्र सिंह धोनी बुधवार को 40 वर्ष के हो गये है

लेकिन हर कोई चाहता था कि टीम इंडिया के सफल कप्तान धोनी को शानदार विदाई मिले लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो पाया. हालांकि, धोनी ने पिछले साल 15 अगस्त 2020 की शाम को एकदम से क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया था.

साल 2007 में माही को टीम इंडिया का बनाया गया था. इसके बाद उन्होंने सफलाओं को अंबार लगा था. टी-20 विश्व, 50-50 ओवर विश्व कप, चैम्पियंस ट्रॉफी और टेस्ट में नंबर वन टीम बनाने में धोनी की बड़ी भूमिका निभाई. धोनी ने साल 2004 में क्रिकेट में कदम रखा था. उन्होंने 2008 में टेस्ट कप्तानी संभाली और ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड पर यादगार सीरीज जीत दर्ज की दिसंबर 2009 में भारत टेस्ट क्रिकेट में नंबर-1 हुए.

साल 2011 और 2012 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर भारतीय टीम हारी थी. ये वहीं दौर था जब टीम इंडिया लगातार आठ टेस्ट में हारी थी. इस हार की वजह से भारत नंबर वन से हट गया था लेकिन 2013 में ऑस्ट्रेलिया को अपने घर में 4-0 से मात दी और उसी साल अजेय रहते हुए इंग्लैंड में चैम्पियंस ट्रॉफी जीती और अगले साल टी-20, विश्व कप के फाइनल में जगह बना ली.

कप्तानी के मामले में उन्होंने 60 टेस्ट, 200 वनडे और 72 टी-20 में भारत की कप्तानी की है. साथ ही उनकी कप्तानी में भारत ने 27 टेस्ट,110 वनडे, 41 टी-20 मुकाबलों में जीत दर्ज की है.

धोनी ने 350 वनडे में 50.58 की औसत 10773 रन बनाये है. इस दौरान उन्होंने दस शतक भी जड़े हैं. ऐसे में क्रिकेट फैन्स को ये बात ठीक नहीं लग रही है कि आखिर क्यों धोनी ने संन्यास लेने का ऐलान किया. अगर धोनी संन्यास लेने भी चाहते थे तो क्या उन्हें बीसीसीआई एक शानदार विदाई नहीं दे सकता था.


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