July 24, 2021

लाठी चलाने की प्राचीन कला को पुराना गौरव दिलाने की शरू हुई कोशिश 

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आज के समय में लोग क्रिकेट, बैडमिंटन, हॉकी, फुटबॉल, मार्शल आर्ट्सजैसे खेलों में न केवल दिलचस्पी लेते हैं बल्कि ज्यादातर प्लेयर खेल के जरिये अपना भविष्य भी तराशने का काम कर रहे हैं. अब लाठी खेल भी स्कूलों के जरिये शामिल करने की कवायद शुरू हो गयी है.

माना जा रहा है कि अगर शहरों में अगर युवा बल्ला चलाकर शोहरत व दौलत कमायेंगे तो गांव के लोग भी लाठी चलाकर खेल दुनियां में न केवल शोहरत हासिल करेंगे. वैसे  पुराने जमाने से चली आ रही लाठी की परंपरा धीरे धीरे पूरे विश्व में फैल चुकी है. बुजुर्गों के जमाने से लाठी का प्रयोग अपनी सुरक्षा के लिए मानव जाति करते चली आ रही है.

जमाना बदलने के साथ साथ लोगो ने लाठियों को अपने तरीके से नया रूप देते रहे हैं. भारत में लाठियां कई प्रकार की होती है. जैसे जैसे नया युग आता गया लाठी एक खेल के रूप में बदलती  चली गयी. इस युग में भारतीयों ने इसे लाठी खेल का नाम दिया गया. कुछ टाइम बीतने के बाद इसे अखाड़ा का नाम दिया. इस तरह अखाड़े में लाठी का खेल सिखाया जाने लगा.

 लाठी खेल को पूरे भारत में फैलाने का काम करेगी ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन

पूरे भारत में ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन, भारत जैसे संगठन ने इस खेल को फैलाने का संकल्प लिया है. ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन- भारत संगठन ने भारत के सभी राज्यों, जिलों, गांव, कस्बों तथा स्कूल तक लाठी का प्रशिक्षण दिया जायेगा. ताकी भारत की आने वाली पीढ़ी इस लाठी की परंपरा को कायम रख सके.

ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन-भारत ये संगठन सेंट्रल गवर्नमेंट के अंदर ट्रस्ट एक्ट में सन 2020 में रजिस्टर्ड संगठन है. ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन- भारत ये संगठन इंटरनेशनल लाठी महासंघ तथा एशियन लाठी महासंघ से संलग्न है. ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन- भारत संगठन भारत सरकार की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम एंटरप्राइज के साथ रजिस्टर्ड है.

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ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन भारत सरकार की फिट इंडिया के अंदर रजिस्टर्ड है, जो खेल मंत्रालय भारत सरकार की संस्था है. ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन- भारत राष्ट्रीय समाज विकास संस्था एवं खेलकूद परिषद से भी जुड़ा है.

ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन प्रयास करेगी कि  स्कूल के बच्चों को लाठी खेल में भी अंक प्राप्त हों और लाठी खेल के सर्टिफिकेट का उपयोग बच्चों के भविष्य में नौकरियों के लिए इस्तेमाल हो सके.

इस लाठी खेल को पूरे भारत में फैलाने का काम ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन – भारत संस्था के पदाधिकारी सतीश चौधरी (अध्यक्ष) डा. राजेश चौधरी (महासचिव) अताउर रहमान (तकनीकी निदेशक) तथा विनोदकुमार वर्मा (कोषाध्यक्ष) तथा कार्यकारी समिति सदस्य गण का योगदान है.

डॉ अताउर रहमान करीब 20 वर्षों से लालगंज कस्बे में मार्शल आर्ट्स की विभिन्न कलाओं को रहे तराश

डॉ अताउर रहमान पेशे से डाक्टर  लेकिन  उन्होंने बीते करीब 20 वर्षों से लालगंज कस्बे में प्लेयर्स को मार्शल आट्र्स की विभिन्न कलाओं से तराशने का काम किया है. अब उनके ऊपर तकनीकी निदेशक के तौर पर लाठी खेल को फर्श से अर्श तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है.

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डॉ अताउर रहमान ने इस छोटे से कस्बे से ताइक्वाण्डो, कराटे, किक बॉक्सिंग, जडो जैसे खेलों में दर्जनों राष्ट्रीय व इंटरनेशनल प्लेयर भी तैयार कर उन्हें कोच भी बना दिया. इनमें कई प्रशिक्षु आज ट्रेनिंग देकर परिवार का सहारा बने है. बताते चले कि इन्हीं प्रशिक्षुओं में गरीब परिवार की डिम्पी तिवारी बालिका को न केवल इंटरनेशनल प्लेयर बनाया बल्कि उसे रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड दिलाने में बढ़ा योगदान दिया है.

अब लाठी खेल को फर्श से अर्श तक पहुंचाने की जिम्मेदारी

डॉ अताउर रहमान
डॉ अताउर रहमान

डॉ अताउर रहमान ने दो दशक पूर्व रायबरेली के लालगंज कस्बे में अपने डाक्टरी पेशे के साथ मार्शल  आर्ट की ट्रेनिंग  देनी शुरू की थी. अब वो लाठी खेल को भी आगे बढ़ाने में जिम्मेदारी निभा रहे हैं. कोरोना में जहां देश भर के खेल मैदानों पर ताले लगे हैं. वहीं डॉ अताउर रहमान व इंटरनेशनल किक बाक्सिंग प्लेयर डिम्पी तिवारी नये खेल लाठी को आगे बढ़ाने के लिए ऑनलाइन व ऑफ लाइन लाठी की ट्रनिंग दे रहे हैं.

ये प्लेयर 6 जून को राजस्थान में खेले जाने वाली ऑनलाइन स्टेट लाठी चैंपियनशिप व 10 जून को महाराष्ट्र में खेले जाने वली स्टेट लाठी चैंपियनशिप की तैयारी में लगे हुए हैं. लाठी कोच व फेडरेशन के तकनीकी निदेशक डॉ अताउर रहमान भी प्लेयर्स के साथ कड़ी प्रैक्टिस कर रहे हैं.

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डॉ अताउर रहमान बोलते हैं कि लालगंज कस्बे को खेल का हब बनाने का सपना बहुत पहले देखा था. देश-प्रदेश में लोग लालगंज को खेल की दृष्टि से जानने लगे हैं. यही परिणाम है  मुझे ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन का तकनीकी निदेशक बनाया गया. डॉ अताउर रहमान बोलते हैं कि ऑनलाइन लाठी ट्रनिंग में यूपी के तमाम जिलों के अलावा अन्य प्रदेशों से भी युवा व बच्चे लाठी की ट्रनिंग ले रहे हैं.

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खास बात ये है कि लाठी ट्रनिंग में लड़कियों की भागीदारी भी ज्यादा है. उन्होंने बोला कि बच्चों के अभिभावक भी लॉकडाउन में अपने घरों में आनलाइन लाठी का प्रशिक्षण ले रहे है. ये प्रशिक्षण 15 जुलाई तक लगातार चलेगा.

लालगंज कस्बे के युवा व बच्चे अब लाठी खेल में चमकने के लिए बहा रहे  पसीना

लालगंज कस्बे में रहने वाले युवा व बच्चे ताइक्वाण्डो, कराटे, बाक्सिंग, किक बाक्सिंग व जूडो में महारथ हासिल करने के बाद लाठी खेल में चमकने के लिए पसीना बहा रहे हैं. कोरोना नियमों को पालन करते हुए प्लेयर्स ने लाठी थाम कर आगे का सफर शुरू किया है. प्रशिक्षण लेने वाले प्लेयर्स में बालक व बालिकाएं शामिल हैं.

इनमें दीक्षा जाधव, सम्भवी सिंह, जानवी सिंह, रिया यादव, डिंपी तिवारी, पावनी कसेरा, सुरभि, पल्लवी सत्यप्रिया, सुप्रिया, आदिति ज्योति, मैत्री, अन्विता, सोनी कुमारी, ओम गुप्ता, जय गुप्ता, सुयश, पियूष, विनायक सोनी,अब्दुल्ला, हसनैन, रमन कुमार, शौर्य जाधव, यशस्वी, वैभव, सिरताज,सुमित, विजय यादव के अलावा तमाम प्लेयर रहते हैं.

देश की राजधानी दिल्ली में अपने देश की प्राचीन युद्व कला लाठी को पुनर्जीवित करने की शुरुआत वर्ष 2020 में हो गयी है. मुझे इसका ऐतिहासिक हिस्सा बनने का मौका मिला. आज  इस युद्धकला को खेल का रूप दिया गया. मैंने सोचा भी नहीं था कि मुझे भी कुछ जिम्मेदारी दी जायेगी.

सतीश चौधरी राजेश, विनोद वर्मा ने अचानक से मुझे लाठी स्पोर्ट्स इंडिया का तकनीकी निदेशक पद की जिम्मेदारी दे दी है. मैं विश्वास दिलाता हूं कि ताइक्वाण्डो, कराटे, किक बाक्सिंग व जूडो जैसे खेलों की तरह मैं लाठी को भी आगे बढ़ाने में पूरी मेहनत कर प्लेयर  तैयार करुंगा. मुझे उम्मीद है कि आगमी लाठी टूर्नामेंटों में यूपी के प्लेयर्स का प्रदर्शन सराहनीय होगा.

  -डॉ अताउर रहमान  (राष्ट्रीय तकनीकी निदेशक, ट्रेडिशनल लाठी स्पोर्ट्स फेडरेशन)


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