July 24, 2021

लम्बे समय से  लालगंज में स्टेडियम की दरकार, बिना स्टेडियम खिलाड़ियों पर पड़ रहा असर 

डॉ अताउर रहमान डिम्पी तिवारी 

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लखनऊ। रायबरेली का लालगंज कस्बा ऐसा है. जहां  न कोई खेल मैदान है और न ही खेल की कोई सुविधा. फिर भी  इस जगह से सेना में भर्ती और खेल में येागदान देने वाले सैकड़ों खिलाड़ी निकले हैं. इनमे से कई राष्ट्रीय तो कुछ अंतर्राष्ट्रीय ख़िलाड़ी भी निकले है. हालांकि यहाँ खेल मैदान नहीं होने से  सैकड़ों युवा सेना भर्ती की तैयारी के लिए  सड़कों पर दौड़कर पसीना बहा रहे हैं.

यहाँ ट्रैक, स्टेडियम, जिम का तो अभाव है ही, युवाओं को गाइड करने वाला भी कोई नहीं है.  बस युवाओं का देश प्रेम का जज्बा उन्हें हौसला दे रहा है जिसके चलते वे सड़कों पर दौड़, कसरत कर सेना भर्ती के मापदंडों को पूरा करने की जी तोड़ मेहनत में जुटे हैं. इस समय गांव के करीब 50 से अधिक युवा आर्मी, बीएसएफ  व पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

हजारों की संख्या में युवा भर्ती और खेलों की तैयारी कर रहे हैं. यहाँ युवा गांव के खेतों, मंदिर परिसर, लिंक मार्गों, नहर किनारे बने कच्चे पक्के मार्गों पर सुबह शाम दौडऩे व ईंट पत्थरों के सहारे व्यायाम करने को मजबूर हैं. सड़कों पर वाहनों के आवागमन से हादसे का भय बना रहता है। युवाओं को खेल व सेना की भर्ती की तैयारी के लिए स्टेडियम की कमी बहुत अखरती है.

टोक्यो में हो रहे ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते माडर्न कोच फैक्ट्री लालगंज रायबरेली के बाक्सिंग खिलाड़ी

खिलाड़ी अपनी क्षमता और प्रतिभा का प्रदर्शन पूरी तरह नहीं कर पाते। क्षेत्र में अगर खेल मैदान का निर्माण करा दिया जाये तो प्रतिभाओं में निखार आयेगा. यहाँ  युवाओं के लिए किसी तरह का कोई स्टेडियम नहीं है और न ही दौड़ने के लिए कोई  ट्रैक है। जबकि क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं हैं.

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वैसे बिना स्टेडियम लालगंज से दर्जनों खेल प्रतिभाओं ने देश का नाम रोशन किया है. इनमे डिम्पी तिवारी को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार भी मिल चुका हैं. यहाँ लालगंज में पिछले लगभग  20 साल से डॉ अताउर रहमान खेलों की बागडोर संभाले हैं. डिम्पी तिवारी ने बताया कि स्टेडियम के बिना कोई भी खिलाड़ी तैयार होने में दिक्कत होती है.

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युवा संदीप का कहना है कि खेल मैदान नहीं होने से मुझे भी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा. मैदान न होने से लड़कियां तो खेलकूद, पुलिस व सेना भर्ती की तैयारी कर ही नहीं पाती हैं. डॉ अताउर रहमान ने बोला  कि गांव के कई खिलाड़ी सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं.

गांव में स्टेडियम न होने के कारण सुबह शाम फिजिकल की तैयारी के लिए शहर जाना पड़ता है और रोज शहर जाने का समय भी प्लेयर्स के पास नहीं होता और उनकी तैयारी रुक  जाती है और अगर गांव में ही स्टेडियम बन जाये तो लगातार तैयारी चलती रहेगी.

 


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