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Milky mushroom

रेडी टू फ्रूट मशरुम बैग से घर में उगाएं दूधिया मशरुम

Milky mushroomलखनऊ: सर्दी के मौसम में तो मशरुम हर जगह उपलब्ध होता है, लेकिन गर्मी और बरसात के मौसम में पहले यह बाजार में मिलता ही नहीं, और मिलता भी है तो बहुत महंगा. जो लोग इसे खाना पसंद करते हैं या स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण इसे खाना जिनकी मज़बूरी है, किसी भी कीमत पर मशरुम खरीदने को बाध्य होते हैं. इन सभी लोगों की आसानी के लिए केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान,  रहमानखेड़ा,  लखनऊ द्वारा ग्रीष्म कालीन दूधिया मशरुम को रेडी टू फ्रूट मशरुम बैग के माध्यम से घर-घर उगवाने का प्रयास प्रारम्भ किया है. इस क्रम में  12  मई को सुबह 9;30 बजे संस्थान के तेलीबाग स्थित कैंपस के अतिथि गृह में एक कार्यक्रम का आयोजन होगा. यह कार्यक्रम रेडी टू फ्रूट मशरुम बैग से उत्पादन लेने के लिए विशेष बिंदुओं को समझाने के लिए आयोजित किया जा रहा है.

केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के तेलीबाग कैंपस में 12 मई को

संस्थान के निदेशक शैलेंद्र राजन ने बताया कि मशरुम उत्पादन भोजन की गुणवत्ता में सुधार करने और उत्तम स्वास्थ्य में सहायक हो सकता है, वहीँ व्यापारिक स्तर पर उगाने पर आजीविका का श्रोत भी बन सकता है. इस दिशा में केंद्रीय उपोषण बागवानी संसथान, रहमानखेड़ा गत 6 वर्षों से प्रयासरत है और धीरे धीरे उत्पादकों की संख्या में बृद्धि हो रही है. कुछ किसान इसको अपना कर 20 -30 लाख रुपये तक का विपणन कर रहे हैं और अन्य छोटे स्तर पर उगा कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं. किसानों को सम्बंधित त्वरित सलाह और बारीकियों को समझने के लिए संस्थान ने दो व्हाट्स एप समूह भी बनाये हैं जिन पर संसथान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार शुक्ल प्रतिदिन सुबह-शाम किसानों द्वारा भेजे गए चित्रों को देख कर सलाह देते हैं.

किसानों को त्वरित सलाह और बारीकी समझाने के लिए बने व्हाट्स एप समूह 

व्हाट्सप्प समूह का सबसे बड़ा लाभ यह पाया गया की समूह पर सदस्य अनुभव के आधार पर आपस में बात करके समस्याओं का निराकरण भी कर लेते हैं . लखनऊ क्षेत्र में विगत में मशरुम के बीज (स्पान) की उपलब्धता न होना भी मशरुम की खेती के प्रसार में बाधक रहा है, लेकिन पिछले 6 वर्षों से हमारा संस्थान सफलता पूर्वक यह कमी दूर करने में सक्षम रहा है. किसानों द्वारा फ़ोन पर ही मांग किये जाने पर मशरुम स्पान तैयार कर दिया जाता है.

मशरूम  न्यूनतम जल उपभोग से अधिकतम उत्पादन देने वाली फसल 

Milky mushroom1मशरूम, अन्य सभी फसलों की अपेक्षा न्यूनतम स्थान से, न्यूनतम जल उपभोग से अधिकतम उत्पादन देने वाली फसल है. इसे मौसम के अनुरूप सामान्य परिस्थितियों में बंद कमरों में उगाया जाता है. ग्रीष्म काल में दूधिया (कैलोसाइब इंडिका) मशरूम और शीतकाल में ढींगरी (प्लूरोटस प्रजाति) तथा बटन (एगेरिकस बाइस्पोरस) मशरुम उगाया जाता है. ढींगरी और दूधिया मशरूम को जिस भूसे पर उगाते हैं, मशरूम उत्पादन के उपरांत उस भूसे की पशुओं को खिलाने हेतु गुड़वत्ता और बढ़ जाती है. ढींगरी और दूधिया मशरूम को उगाने पर भूसे में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट्स के कुछ भाग का उपभोग हो जाता है तथा इसमें प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, बटन मशरुम की खेती कम्पोस्ट बनाकर की जाती है और मशरुम उत्पादन के उपरांत यह कम्पोस्ट खेतों में प्रयोग करने पर सामान्य कम्पोस्ट की अपेक्षा फसलों के लिए कही अधिक लाभकारी होती है. चूँकि बटन कम्पोस्ट एक विशेष विधि से बनायीं जाती है अतः इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भी अधिक होती है और इसमें उपस्थित विशेष शूक्ष्म जीव फसलों के लिए अधिक लाभकारी होते हैं.

रक्तचाप, मधुमेय और ह्रदय रोगियों के लिए बहुत उपयोगी 

मशरूम को चीन में अमरता का भोजन तथा भारत में स्वास्थ्य भोजन कहा जाता है. इसका कारण है कि यह रक्तचाप, मधुमेय और ह्रदय रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है. इसमें वसा की नगण्य मात्रा,कार्बोहइड्रेट का स्टार्च विहीन होना, प्रोटीन तथा शूक्ष्म पोषक तत्वों से परिपूर्ण होना इसे औषधीय रूप से उपयोगी बनाता है मशरूम में प्रोटीन (20-40 प्रतिशत), रेशा (0.5-1.3 प्रतिशत) तथा खनिज (0.5-1.4प्रतिशत) होता है/ इसमें कार्बोहाइड्रेट (3.0-5.2 प्रतिशत), वसा (0.10-0.034 प्रतिशत) तथा कैलोरी (16-37) होता है। इसमें उपस्थित अधिक रेशा पाचन क्रिया को सुचारु बनाने में सहायक होता है. यह डायबिटीज तथा हृदय रोगियों के लिये स्वास्थ्यकर खाद्य माना जाता है।.

रोजगार उपलब्ध कराने को ध्यान में रखते हुये किस्मों को अपनाने पर जोर 

Milky mushroom2मशरूम की खेती से रोजगार उपलब्ध कराने को ध्यान में रखते हुये संस्थान द्वारा मशरूम की बटन, ओयस्टर तथा दूधिया किस्मों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है. मशरूम उत्पादन प्रणाली के अंतर्गत किसान बटन मशरूम को दिसंबर से फरवरी की बीच बेच सकते हैं जबकि ओयस्टर को अक्टूबर से अप्रैल के प्रथम पखवाड़े के मध्य. दूधिया मशरूम की बिक्री अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से मध्य अक्टूबर तक की जा सकती है. दूधिया और आयस्टर मशरूम गेहूँ के भूसे पर उगाये जाते हैं. भूसे का उपचार गर्म पानी या रसायनों (कार्बेन्डाजिम तथा फॉर्मेलिन) द्वारा करके 60-65 प्रतिशत नमी पर बिजाई करते हैं. इनको उगने में 20 से 25 दिन का समय लगता है तथा उत्पादन 30 से 35 दिन के बाद प्रारंभ हो जाता है जो कि अगले 40 से 45 दिनों तक जारी रहता है. सतत् उत्पादन के लिये मशरूम की बिजाई साप्ताहिक अंतराल पर करना चाहिए. दूधिया मशरूम को अनुकूल तापमान पर इसे तीन से चार दिन तथा कम तापमान पर सात से आठ दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

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