July 24, 2021

यूपी में अब तंबाकू उत्पाद की बिक्री के लिए लेना होगा  लाइसेंस

प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया

प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया

Share This News

लखनऊ।  तंबाकू से जुड़े उत्पादों से हो रहे नुकसान को देखते हुए  उत्तर प्रदेश सरकार ने इस  निर्णय पर मुहर लगा दी कि राज्य में अब वो ही विक्रेता तंबाकू, सिगरेट और संबद्ध उत्पाद बेच सकेंगे जो बिक्री के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेंगे.  ये फैसला जनस्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी हो सकता है.

राज्य में तंबाकू की बिक्री के लिए नियमन के लिए  लाइसेंसिंग को इसलिए जरुरी कहा गया है कि लोगों को तंबाकू  के उत्पादों से होने वाली जीवनभर की पीड़ा से बचाने के लिए तंबाकू तक पहुंच का नियमन जरुरी है. अब सिगरेट, बीड़ी, खैनी आदि बेचने वाले विक्रेताओं के लिए लाइसेंस होने से तंबाकू नियंत्रण के लिए लागू नियमों और नीतियों का प्रभावी प्रवर्तन होगा.

प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया
प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया

इस फैसले का वालंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने स्वागत किया है. एसोसिएशन की मुख्य कार्यकारी भावना मुखोपाध्याय ने बोला कि तंबाकू के उपयोग से नुकसान सबको पता है जो दुनिया भर में सब जानते है. इससे बच्चों के लिए तंबाकू उत्पादों को देखना और खरीदने के कम अवसर मिलेंगे. उन्होंने आगे कहा कि उम्मीद हैं कि दूसरे राज्य उत्तर प्रदेश की इस पहल का अनुसरण करेंगे.

वैसे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को अपने  एडवाइजरी लेटर में  तंबाकू विक्रेताओं की लाइसेंसिंग नगर निगम से कराने की सिफारिश की है. इसके साथ लाइसेंस में यह शर्त  जोड़ने को कहा गया था कि तंबाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानें गैर तंबाकू उत्पाद जैसे टॉफी, कैन्डी, चिप्स, बिस्कुट, शीतल पेयर आदि की बिक्री नहीं कर सकेंगी (विशेषकर ऐसी चीजें जो बच्चों के लिए हों).

कोरोना की तीसरी लहर के बारे में ये है आईआईटी के विशेषज्ञों की राय

इस बारे में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने भी ऐसी ही एडवाइजरी राज्यों के प्रमुख सचिवों को भेजी है और तंबाकू उत्पाद बेचने वाली ज्यादा दुकान खोलने को हतोत्साहित करने को कहा गया है.

बताते चले कि भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के  ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश में 35.5 फीसदी वयस्क (15 साल और ऊपर) किसी न किसी तरह तंबाकू का उपयोग करते हैं, वैसे तंबाकू के उपयोग से होने वाली बीमारी की कुल प्रत्यक्ष और परोक्ष लागत 182,000 करोड़ रुपए यानि देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.8 फीसदी है.


Share This News