July 24, 2021

कोरोना काल में ठप्प पड़ा जूनियर क्रिकेट, नहीं दिख रही कोई योजना 

प्रतीकात्मक फोटो सोशल मीडिया

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लखनऊ। कोरोनाकाल के दौरान बीते वर्ष भी बोर्ड ट्राफी में हिस्सा लेने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों  को वंचित होना पड़ा था। इस बार भी अंडर-16, 19, 22 व 23 आयु वर्ग के खिलाड़ियों  पर बुरा असर दिख रहा है। खिलाड़ी इस बात से चिंतित हैं कि उनकी आयु दो-चार माह भी बढ़ गयी तो उनका भविष्य बरबाद हो जायेगा। वहीं राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर की खेल अकादमियां पूरी तरह से वीरान हो गयीं हैं।

आयु वर्ग के प्लेयर्स के फ्यूचर पर संकट

प्रतीकात्मक फोटो सोशल मीडिया
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जहां सुबह शाम दर्जनों बच्चे क्रिकेट की बारीकियां सीखते थे वे मैदान अब सूने हो गये हैं। दरअसल देश में इस समय कोरोना कहर टूट रहा है। आलम तो यह है कि कोरोना की दूसरी लहर में लोगों की लगातार जान जा रही है। कोरोना ने इस दौरान कई खेलों का खेल बिगाड़ दिया है। बात अगर क्रिकेट की जाये तो कोरोना की वजह से एक बार फिर घरेलू क्रिकेट को निराशा झेलनी होगी।

इसके अलावा जूनियर क्रिकेटरों को लगातार दूसरे साल झटका लगना तय है। हालांकि बीसीसीआई का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल पर पूरा फोकस है लेकिन घरेलू क्रिकेट को लेकर उसके पास कोई ठोस योजना  नहीं दिख रही , वैसे बीसीसीआई आईपीएल जैसी बड़ी प्रतियोगिता किसी और देश में करा सकता है लेकिन जूनियर क्रिकेट के लिए उसके हाथ खाली है।

ऐसे में बड़ा सवाल है कि अंडर-16, अंडर-19, अंडर-22 व 23 जैसे खिलाड़ियों  का  क्या, जिनका भविष्य पिछले दो साल से कोरोना के चलते अधर में है क्योंकि जूनियर क्रिकेट पूरी तरह से बंद पड़ा है। आलम तो यह है कि कई खिलाड़ी अपने आयु वर्ग में अब शायद नहीं खेल पायेंगे। अकादमी पूरी तरह से बंद है और जूनियर खिलाड़ी घर पर रहने के लिए मजबूर है।

यूपी से अंडर-19 बोर्ड ट्राफी की तैयारी कर रहे आयुष गुप्ता बताते हैं कि करीब 12 सालों से क्रिकेट खेल रहा हूं। इस बार बोर्ड अण्डर-19 बोर्ड ट्राफी की तैयारी भी पूरी तरह से कर चुका था, जिला व मण्डल के ट्रायल भी दे चुका था मगर कोरोना के दूसरी लहर ने एक बार फिर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रायल रद्द होते हैं तो मेरा भविष्य अंधकार में जा सकता है।

प्रतीकात्मक फोटो सोशल मीडिया
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आयुष ने बताया कि तीन माह बाद मेरी आयु 19 साल पूरी हो जायेगी। इसके बाद चयन में शामिल नहीं किया जायेगा। अमजद हुसैन बताते हैं कि इस बार मेरी आयु अण्डर- 16 ट्रायल देने की थी। मगर जून के बाद मेरी आयु ज्यादा हो जायेगी। ऐसे में अण्डर-16 क्रिकेट बोर्ड ट्राफी ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सकूंगा।

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रवि वर्मा बताते हैं कि क्रिकेट के जुनून ने सभी शौक पर पहरा बैठा दिया। क्रिकेट में भविष्य बनाने केे लिए दिन रात मेहनत कर देश की टीम में शामिल होने का मौका तलाशने लगा। मगर बीते दो सालों से क्रिकेट सहित सभी खेलों पर कोरोना का कहर टूट पड़ा। ऐसे में खिलाडिय़ों ने घर पर रहकर कुछ अभ्यास जरूर किया। मगर ट्रायल न होने से हम खिलाडिय़ों का भविष्य अधर में चला गया।


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