July 24, 2021

75वें जन्मदिवस पर डा. विद्याविन्दु सिंह को लोक रत्न सम्मान

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लखनऊ। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विद्या विन्दु सिंह के 75वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को शहर में विविध आयोजन हुए। पौधारोपण, सम्मान समारोह के साथ ही उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केन्द्रित आनलाइन हुए कार्यक्रमों में देश-विदेश से साहित्य व कला जगत के नामचीन लोग सम्मिलित हुए. सभी ने डा. सिंह के दीर्घकालीन साहित्यिक अवदान को रेखांकित करते हुए उनके दीर्घायुष्य की कामना की.

डा. अमिता दुबे एवं अलका प्रमोद की कृति ‘अविरल सक्रिय सर्जक डॉ. विद्या विन्दु सिंह’ का लोकार्पण

डॉ. विद्याविन्दु सिंह अमृत महोत्सव आयोजन समिति के संयोजन में आयोजित मंगल वाचन कार्यक्रम में प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित, प्रो. कमला श्रीवास्तव, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, आनन्दवर्द्धन सिंह, डॉ. भारती सिंह ने डॉ. विद्याविन्दु सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतितव के विविध पक्षों पर विस्तार से अपनी बात रखी. एसके गोपाल के संचालन में हुए कार्यक्रम में सिंगापुर, अमेरिका सहित देश के कोने कोने से लोग जुटे.

साहित्यिक संस्था साहित्य आराधन, प्रकाशक-मुम्बई एवं युगधारा फाउण्डेशन की ओर से डा. अमिता दुबे व अलका प्रमोद की सद्यः प्रकाशित कृति ‘अविरल सक्रिय सर्जक डॉ. विद्या विन्दु सिंह’ का लोकार्पण हुआ. वहीं साहित्य आराधन द्वारा श्रीकृष्ण कुमार अनिल स्मृति साहित्य आराधन सम्मान प्रदान किया गया.

कार्यक्रम में डा. करुणा पांडेय, डा. भारती सिंह, डा. संगीता शुक्ला, डा. अमिता दुबे, अलका प्रमोद, राजुल अशोक, अशोक हमराही, संजीव जायसवाल ‘संजय’, नीलम राकेश, अजय श्री, प्रमोद कुमार पांडेय, रोली त्रिपाठी, अभिषेक पांडेय, आलोक कुमार दुबे, अंशुमा दुबे, अविरल नारायण दुबे आदि सम्मिलित हुए.

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क प्रकृति संचेतना अभियान द्वारा केसरबाग स्थित बलरामपुर छात्रावास परिसर में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में डॉ. विद्याविन्दु सिंह के हाथों पीपल के पाँच पौधे रोपे गये.यहीं लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से डॉ विद्याविन्दु सिंह को लोक रत्न अलंकरण से विभूषित किया गया। कार्यक्रम में श्रीमती सुमन पाण्डा, रेखा अग्रवाल, सुशीलचन्द श्रीवास्तव, सुधा द्विवेदी, किरन यादव आदि सम्मिलित हुए.

अवध भारती संस्थान द्वारा डॉ. विद्याविन्दु सिंह को अवध ज्योति शिखर सम्मान प्रदान किया गया. कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष डा. रामबहादुर मिश्र, उपाध्यक्ष पप्पु अवस्थी, आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप’ आदि उपस्थित रहे. प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित की ओर से  साहित्यिकी सारस्वत सम्मान प्रदान किया।

डॉ. विद्याविन्दु सिंह : एक दृष्टि

कृतियाँ – 118 प्रकाशित एवं 18 प्रकाशनार्थ। उपन्यास 9, कहानी संग्रह 10, कविता संग्रह 12, लोक साहित्य 26, नाटक 6, निबन्ध संग्रह 10, नवसाक्षर एवं बाल साहित्य 23, संपादित 22, अन्य अनेक पुस्तकों और पत्रिकाओं का सम्पादन. आकाशवाणी, दूरदर्शन के विभिन्न केन्द्रों से निरन्तर प्रसारण, देश- विदेश की संस्थाओं, विश्वविद्यालयों से सम्बद्ध.

कृतित्व पर शोध कार्य- लखनऊ., गढ़वाल, श्रीनगर, कानपुर, पुणे वि. वि., उच्च शिक्षा और शोध संस्थान दक्षिण भारत, चेन्नई द्वारा.

अनुवादः सच के पाँव (कविता संग्रह) का नेपाली में अनुवाद, साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा पुरस्कृत। मलयालम, मराठी, कश्मीरी, तेलगू, बांगला, उड़िया, जापानी, अंग्रेजी भाषाओं में अनुवाद.

विदेश यात्राएँः साहित्यिक आयोजनों में देश-विदेश में सक्रिय भागीदारी.

सम्मान : देश-विदेश की 108 संस्थाओं द्वारा सम्मान एवं पुरस्कार.

अवधी कृतियाँः- उपन्यास-1, कहानी संग्रह-3, लोक साहित्य-25, कविता संग्रह-1, नाटक-5 तथा कई समीक्षाएँ.

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ में संयुक्त निदेशक पद से सेवानिवृत्त. कई सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक संस्थाओं से सम्बद्ध रहते हुए साहित्य और समाज सेवा का कार्य.


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