July 25, 2021

आदिगंगा मां गोमती के 21 कलशों से हुआ मनकामेश्वर महादेव का महाजलाभिषेक

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लखनऊ। गंगा सप्तमी पर डालीगंज स्थित प्रतिष्ठित मनकामेश्वर मठ मंदिर में श्रीमहंत देव्यागिरि की अगुआई में आदिगंगा मां गोमती के 21 कलशों से महादेव मनकामेश्वर का जलाभिषेक किया गया. इसके साथ ही महिला मंडली द्वारा कोरोना, तूफान और देशों के बीच बढ़ते तनावों से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का सरस पाठ भी किया गया.

गंगा सप्तमी पर कोरोना, तूफान और तनावों से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ

श्रीमहंत देव्यागिरि ने मठ मंदिर परिसर में स्थापित मकर आसन पर विराजी मां गंगा की प्रतिमा के सामने विधिविधान से मां गंगा की आरती की। मंदिर परिसर में उपस्थित महिला मंडली द्वारा “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” का पाठ कर जगत कल्याण की कामना की गई.

इसके साथ ही मंगलवार के कारण हनुमान चालीसा का पाठ कल्याणी गिरि, गौरजा गिरि, रीतू गिरि, उपमा पाण्डेय, रीता श्रीवास्तव, तुलसी पाण्डेय ने किया. महंत देव्यागिरि ने बताया कि मान्यता के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन ही देवीमां गंगा, स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं में समायी थीं.  इसके बाद ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरे पर देवीमां गंगा, धरती पर प्रवाहित हुई थीं.

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प्रचलित कथा के बारे में श्रीमहंत देव्यागिरि ने बताया कि अयोध्या के राजा सगर के अश्वमेघ यज्ञ को असफल करने के लिए देवराज इन्द्र  ने उनके अश्व को महर्षि कपिल के आश्रम में छिपा दिया था. जब राजा सगर के साठ हजार बेटों ने वहां पहुंच कर महर्षि की तपस्या में खलल डाली तो उन्होंने सभी को भस्म कर दिया.

चूंकि महर्षि अगस्त ने सारी नदियों का पानी पी लिया था इसलिए पूर्वजों की शांति और तर्पण के लिए कोई नदी नहीं बची थी. ऐसे में देव नदी को धरती पर लाने के लिए राजा सगर, अंशुमान और महाराज दिलीप ने तपस्या की पर वह असफल रहे। अंत में महाराज दिलीप के बेटे भगीरथ की तपस्या सफल हुई.

वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण का दिया गया संदेश

महंत देव्यागिरि ने कहा जल ही जीवन है. ऐसे में लोगों को अभी से जागरुक हो जाना चाहिए नहीं तो निकट भविष्य में आक्सीजन सिलेंडर की तरह पीने योग्य जल के लिए भी हलकान होना पड़ेगा इसलिए नदियों को साफ रखा जाए. बरसात से पहले तालाबों का निर्माण करवाया जाए और भवनों पार्कों के माध्यम से वर्षा जल को दोबारा धरती में पहुंचाने की जुगत युद्ध स्तर पर की जाए.


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