July 24, 2021

यादों में रह गए महान धावक मिल्खा सिंह, लखनऊ से था खास जुड़ाव

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लखनऊ : एक महीने तक कोरोना से जंग लड़ रहे दिग्गज एथलीट मिल्खा सिंह ने 91 साल की आयु में चंड़ीगढ़ के पीजीआई हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. इससे पांच दिन पहले उनकी वाइफ और भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर का कोरोना से मौत हो गई थी.

मिल्खा सिंह ने 1958 में हुए राष्ट्रमण्डल खेलों और 1956 के मेलबर्न में हुए ओलंपिक में यादगार दौड़ लगाई है. राजधानी लखनऊ में 1954 में आल इंडिया सर्विसेज मीट में 400 मीटर की दौड़ मिल्खा सिंह के जीवन की सर्वश्रेष्ठ दौड़ थी.

इस दौड़ में उन्होंने 45.8 सेंकड का टाइम लेकर नया रिकॉर्ड बनाया था और टूर्नामेंट में गोल्ड मैडल अपने नाम किया था.
ये उस टाइम का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी था.

इसके बाद जब वो अक्टूबर 2006 में लखनऊ आये थे, तब वे छावनी स्थित सेना के एएमसी सिंडर ट्रैक पर भी गये थे. इस ट्रैक पर आने के बाद उन्होंने पहले ट्रैक की मिट्टी को सिर पर लगाया था. यहाँ पहुंचते ही वो 1954 की दौड़ की यादों में खो गये थे. वो इस ट्रैक पर चार नंबर की लेन पर दौड़े थे.

उन्हें याद था कि उन्होंने अपनी दौड़ एएमसी के ऐसिहासिक एथलेटिक्स ट्रैक पर कहां से उठाई थी और कहां पर जाकर खत्म हुई थी. हालांकि उन्हें अपने साथ दौड़ने वाले साथियों के बारे में नहीं याद था.

मिल्खा सिंह को लखनऊ में आना अच्छा लगता था. हालांकि स्वास्थ्य कारणों से वो बार-बार यहाँ आने के लिए यात्रा नहीं कर सकते थे. वो 2006 के बाद 2017 और 2018 में भी लखनऊ आये थे. 2018 में वो राजधानी के स्कूली कार्यक्रम में आये थे. इस स्कूल ने अपने परिसर में मिल्खा सिंह स्टेडियम बनाने का ऐलान किया था. मिल्खा सिंह ने स्कूल पहुंचकर बच्चों को अपनी दास्तां सुनाते हुए बोला था कि सफलता का शॉर्टकट नहीं होता है.

किसी लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत और लगन होनी जरूरी है. उन्होंने बच्चों को ये भी बोला था कि ये शहर उनके दिल में बसता है और इसी नवाबी शहर में उन्होंने अपने जीवन की बेहतरीन दौड़ लगाई थी. वही मिल्खा सिंह ने बोला कि मेरी जिदंगी की बड़ी इच्छा है कि एथलेटिक्स में ओलंपिक में कोई भारतीय मेडल जीते.

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मिल्खा सिंह ने उस समय ये भी बोला था कि हमारे टाइम में न ट्रैक सूट थे तो रनिंग शूज भी नहीं थे लेकिन फिर भी हम दौड़े और पदक जीते. हम आर्मी की जर्सी पहन कर दौड़ते थे. हमने बहुत मेडल जीते लेकिन रोम ओलंपिक-1960 में पदक से चूक कर चौथे स्थान पर रहने का अफसोस है. 91 साल के मिल्खा सिंह 1960 के रोम ओलंपिक में 47.6 सेकेंड का रिकार्ड तोड़ समय निकलने के बावजूद चौथे स्थान पर रहे थे और मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गए थे.

मैने रोम ओलंपिक में वर्ल्ड रिकार्ड बनाया था लेकिन रिकार्ड से चूक गया था. पाकिस्तान में फ्लाइंग सिख का खिताब पाने वाले मिल्खा सिंह ने बोला कि भारत एथलेटिक्स के क्षेत्र में आज पिछड़ चुका है. उन्होंने कहा कि मै अपनी जिदंगी में तीन बार रोया था पहली बार जब मेरे मां बाप बंटवारे के समय कत्ल कर दिए गए थे.

रोम ओलंपिक में मेडल चूकने पर रोया. इस अवसर पर उन्होंने एक शेर बोला कि हाथ की लकीरों से जिदंगी नहीं बनती, अजम (विलपावर) हमारा भी कुछ हिस्सा है जिदंगी बनाने का. उन्होंने बोला कि अमेरिका के प्रेसिडेंट रहे बराक ओबामा ने एक बार बोला था कि मैं भारत में तीन लोगों को जानता हूं. उनमें से पहला मिल्खा सिंह, दूसरा फिल्म स्टार शाहरूख खान और तीसरा बाक्सर मैरीकॉम.

उन्होंने बोला कि लखनऊ से मेरी यादें जुड़ी है. मैने यहीं पर एएमसी सेंटर में लगे एथलेटिक्स ट्रैक पर प्रैक्टिस की थी, तब वहां सिंडर ट्रैक हुआ करता था. मैने यहीं पर 1956-57 में हुई आल इंडिया सर्विसेज एथलेटिक्स मीट में एशिया का बेस्ट टाइम निकालते हुए मेडल जीता था. हालांकि अब वहां पर ट्रैक बदल गया है लेकिन यादें पुरानी ताजा हुई.

उन्होंने अपने जीवन पर आधारित फिल्म भाग मिल्खा भाग को देखकर पुरानी यादें ताजा की और कई दृश्यों को देखकर वो भावुक हो गये. उन्होंने बोला कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है. उन्होंने बोला कि रोम ओलंपिक-1960 में मैं फोटो फिनिश से पिछड़कर चौथे स्थान पर रहा था.

पहले 200 मी तो मैं तेजी से दौड़ा था लेकिन उसके बाद 250 मी पर थोड़ा धीमा पड़ा था और एक बार जब आपकी स्पीड टूटी तो रिकवरी मुश्किल हो जाती है. उस टाइम अमेरिका के ए.डेविस ने जो पदक जीता था वो रिले रेस धावक थे. उनको एक प्लेयर के घायल होने से अवसर मिला था.

 


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