July 25, 2021

सुमित हुए बाहर लेकिन ओलंपिक में नहीं जाएगा दूसरा पहलवान

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टोक्यो ओलंपिक में क्वालीफ़ाई कर चुके 125 किलो वेट कैटेगरी के पहलवान सुमित के पहले डोप टेस्ट में फेल होने के बाद उनकी जगह रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया किसी अन्य पहलवान को नहीं भेजने वाला है.

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर ने कहा कि सुमित बुल्गारिया में यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के तत्वाधान में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग ओलंपिक क्वालीफाइंग इवेंट में लिए सैंपल में पॉजिटिव पाए गए थे.

ये सैंपल इंडिया के बाहर की एजेंसी ने लिया था. ऐसे में नियमों के चलते देश का कोटा भी खत्म हो जाता है. ओलंपिक नियमों के अनुसार पहलवान देश के लिए कोटा हासिल करता है और नेशनल फेडरेशन उसे किसी को भी ट्रांसफर कर सकता है.

तोमर के मुताबिक, सुमित का सैंपल भारत में नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) की ओर से होता और वो उसमें पॉजिटिव निकलते तो कोटा किसी अन्य खिलाड़ी को दिया जा सकता था लेकिन सुमित का सैंपल देश के बाहर हुआ है, इसलिए खिलाड़ी पर बैन के साथ ही देश का कोटा भी खत्म हुआ है.

इसके साथ सुमित के डोप में फेल होने पर रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया पर 16 लाख का जुर्माना भी लगाया है. सुमित अस्थायी रूप से बैन लगाया गया है.

तोमर ने कहा कि सुमित के बी सैंपल के बाद सुनवाई के दौरान फेडरेशन भी अपना पक्ष रखेगा. सुमित का ए सैंपल पॉजिटिव मिलने के बाद बी सैंपल का परीक्षण होगा.

सुमित को 10 जून तक वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी को आवेदन करना होगा. बी सैंपल निकलने के बाद ही सुमित को अपना पक्ष वाडा और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के सामने रखना होगा. फेडरेशन भी अपना पक्ष रखेगा.

दरअसल, डोप के लिए सैंपल वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) और इससे मान्यता प्राप्त किसी देश की नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी लेती है. नाडा सैंपल की रिपोर्ट वाडा को भी भेजती है. जिसके बाद वाडा और नाडा की ओर से खिलाड़ी पर बैन लगाया जाता है.

सूत्रों के मुताबिक सुमित अप्रैल में एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप से आने के बाद कैंप में ही थे और मई में वर्ल्ड रेसलिंग क्वॉलीफाइंग इवेंट के लिए गए थे.

सुमित को एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के दौरान घुटने में चोट लगी थी. वो कैंप में थे. ऐसे में मेडिकल टीम को उनके चोट की जानकारी थी. मेडिकल टीम को उनके दवा लेने के बारे में पता था.

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इस पर तोमर का कहना है कि सुमित इंटरनेशनल स्तर के पहलवान हैं. उन्हें पता है कि बैन दवा कौन सी है. हमेश देखरेख रखना मुश्किल है. उन्होंने ज्यादा दर्द होने पर आयुर्वेद की दवा ली थी.

रियो ओलंपिक से पहले भी सुमित ओलंपिक क्वॉलीफायर के दौरान शुरुआती मैच हारने के बाद स्टेडियम से ही चले गए थे और रेपचेज मैच नहीं खेला था.

बाद में रेपचेज में चैंपियन बने पहलवान को ओलंपिक टिकट मिलता था. इसके बाद रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कार्रवाई की थी. गौरतलब है कि ये दूसरी बार है, जब ओलंपिक से पहले कोई भारतीय पहलवान डोप टेस्ट में फेल हुआ हो. इससे पहले 2016 में रियो ओलंपिक से पहले पहलवान नरसिंह यादव का मामला था.

2016 में 74 किलो वेट में नरसिंह और 2 बार के ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार दावेदार थे. सुशील ओलंपिक क्वालीफायर्स के ट्रायल में हिस्सा नहीं ले पाए.

इसके बाद नरसिंह को ओलंपिक क्वालीफायर्स इवेंट के लिए भेजा गया. नरसिंह ने अपनी प्रतिभा से कोटा मिला. बाद में उन पर डोपिंग का डंक लग गया.

 


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