July 28, 2021

अब यूपी में मिथाइल अल्कोहल  के अवैध व्यापार के खिलाफ होगा एक्शन 

फाइल फोटो सोशल मीडिया

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लखनऊ। अलीगढ़ में हुए जहरीली शराबकांड से मचे कोहराम के बाद  उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाये थे और अब सरकार ने मिथाइल अल्कोहल के अवैध व्यापार में जुड़े लोगो के  खिलाफ सख्त कार्रवाई का दिशा-निर्देश दिए हैं.

इस बारे में आबकारी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी ने इस सम्बंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विष अधिनियम के चलते मिथाइल अल्कोहल जहर घोषित है और इसके चलते इसकी बिक्री के लिए लाइसेंस और परमिट जारी करने का प्रावधान है और  इसके लिए जिलाधिकारी लाइसेंस प्राधिकारी के रूप में अधिकृत है.

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इन नियमों के चलते मजिस्ट्रेट के अलावा, पुलिस, राजस्व अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी और आबकारी तथा उद्योग के अधिकारी (निरीक्षक के पद से नीचे नहीं) को इन लाइसेंसों के निरीक्षण का अधिकार है.

उन्होंने बोला कि  प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट/लाइसेंस प्राधिकारी द्वारा नामित अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय नोडल समिति बनेगी जिसमे अपर पुलिस अधीक्षक सदस्य तथा जिला आबकारी अधिकारी सदस्य/ संयोजक होंगे. अपर मुख्य सचिव भूसरेड्डी के अनुसार मिथाइल अल्कोहल के प्रयोग पर कड़ी निगरानी के आदेश हैं.

अब यदि मिथाइल अल्कोहल के उत्पादन के लिए लाइसेंस प्राप्त इकाइयों के अलावा कोई अन्य इकाई ये  कारोबार करेगी तो  ऐसी इकाई के खिलाफ सख्त एक्शन होगा. मिथाइल अल्कोहल के उत्पादन, भंडारण और बिक्री की गहन निगरानी होगी और इसके टैंक और कंटेनरों पर स्पष्ट रूप से मिथाइल अल्कोहल लिखा होगा.

इसके साथ मिथाइल अल्कोहल का परिवहन करने वाले टैंकरों पर मोटे तथा सफेद अक्षरों में विषैला पदार्थ परिवहन किये जाने सम्बन्धी सूचना और कानूनी चेतावनी तथा दोनों तरफ उसके विष होने सम्बन्धी चिन्ह अंकित किया जाना अनिवार्य है और मिथाइल अल्कोहल की चोरी रोकने के लिए टैंकर ठीक से सील होंगे और  इसकी पुष्टि के बाद ही टैंकर भेजे जायेंगे.

अपर मुख्य सचिव के अनुसार मिथाइल अल्कोहल के अवैध व्यापार में संलिप्त पाये जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ मिथाइल अल्कोहल से बनी अवैध शराब पीने से मौत  पर और बड़ी मात्रा में अवैध शराब मिलने पर  स्थानीय आबकारी व पुलिस अधिकारियों व कर्मियों की जवाबदेही तय होगी.

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वही अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और एनएसए लगेगा और उनकी संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई होगी.  कोई आदमी जो किसी भूमि या भवन का स्वामी है या ऐसे स्वामी का प्रबंधक है, जहॉं पर किसी नशीले पदार्थ का अवैध निर्माण होता है और लेखपाल या चौकीदार जिसके अधिकार क्षेत्र में ऐसी भूमि या भवन स्थित है, मजिस्ट्रेट या आबकारी, पुलिस या राजस्व विभाग के किसी अधिकारी को तुरंत सूचना देने के लिए बाध्य है.

आबकारी अधिनियम की संशोधित धारा 60क की व्याख्या को बताते हुए करते हुए अपर मुख्य सचिव ने बोला कि कोई व्यक्ति नशे की आड़ में कोई हानिकारक पदार्थ बेचता है और इससे मृत्यु या गंभीर अपंगता होती है, तो उसे मौत या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है और दस लाख रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है जो पांच लाख रुपये से कम नहीं होगा।

अपर मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि शराब माफियाओं की  लिस्ट की बारीकी से जांच होंगी और तय होगा कि  कोई भी अपराधी बरी न हो या आरोप पत्र से उसका नाम न छूटे. यदि ऐसा हुआ तो धारा 319 के तहत पुनरीक्षण की कार्रवाई कर पुनः ऐसे अभियुक्त का नाम नियमानुसार सम्मिलित करना तय हो.

क्षेत्रीय अधिकारियों को एक हजार लीटर से अधिक अवैध शराब, केमिकल या स्प्रिट बरामद वाले प्रत्येक मामले की समीक्षा करने का भी आदेश है.  वही राजमार्ग परसंदिग्ध ढाबों और स्थानों की तत्काल पहचान करने और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश  हैं.

उन्होंने आम जनता से अवैध स्रोतों से शराब न खरीदने की अपील की है. बताते चले कि गौरतलब है कि हाल ही में अलीगढ़ जिले में जहरीली शराब पीने से अनेक लोगों की मौत हुई और जांच में सरकारी ठेके के माध्यम से बिकी  जहरीली शराब में मिथाइल एल्कोहल जहर का पता चला था,


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