July 25, 2021

Olympics : महिला सिंगल्स में भारत के पदक की प्रबल दावेदार है पीवी सिंधु

Share This News

टोक्यो ओलंपिक का आयोजन जुलाई में होगा. इसी बीच साइना नेहवाल व पीवी सिंधु के पदक के सफर को आगे बढ़ाते हुए भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी आगामी टोक्यो ओलंपिक में पदक की हैट्रिक पूरी करने के लक्ष्य के साथ खेलने वाले है. पिछले दोनों ओलंपिक में भारत ने पांच में से चार वर्ग में चुनौती पेश की थी लेकिन इस बार भारतीय खिलाड़ी सिर्फ तीन वर्ग में क्वालीफाई करने में सफल रहे हैं.

साइना नेहवाल खराब रैंकिंग के चलते लगातार चौथी बार ओलंपिक में खेलने का अपना सपना पूरा नहीं कर सकी. वर्ल्ड चैंपियनशिप 2019 की गोल्ड मैडल विजेता और 2016 रियो ओलंपिक की सिल्वर मैडल चैंपियन सिंधु महिला सिंगल्स में भारत के लिए पदक की प्रबल दावेदार हैं.

गौरतलब है कि साइना लगभग नौ वर्ष पूर्व चार अगस्त 2012 को लंदन खेलों में कांस्य पदक के साथ बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनी थी. चार साल बाद रियो ओलंपिक में सिंधु ने 19 अगस्त 2016 को सिल्वर मैडल अपने नाम किया था. सिंधु को फाइनल में कड़े मैच में स्पेन की कैरोलिना मारिन के खिलाफ हारी थी.

पुरुष सिंगल्स में पदक का दारोमदार वर्ल्ड चैंपियनशिप 2019 के कांस्य पदक चैंपियन बी साई प्रणीत के कंधों पर होगा. पुरुष डबल्स में सात्विक साईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेगी. दुनिया की 10वें नंबर की ये जोड़ी उलटफेर करने में सक्षम है.

सिंधु रियो ओलंपिक के फाइनल में मारिन के खिलाफ कड़े मैच में 21-19, 12-21, 15-21 से हार मिली थी, लेकिन ओलंपिक में सिल्वर पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनी. ये स्टार खिलाड़ी अब टोक्यो में एक कदम आगे बढ़कर गोल्ड मैडल जीतने के इरादे से उतरेगी.

ये भी पढ़े : लाॅकडाउन के लम्बे समय बाद फिटनेस रूटीन से हुई फार्म वापसी : पीवी सिंधु

ये भी पढ़े : पीवी सिंधु बनाई गई इंटरनेशनल ओलंपिक के ‘बिलीव इन स्पोर्ट्स’ कैंपेन की दूत

दूसरी तरफ साई प्रणीत वर्ल्ड चैंपियनशिप 2019 में दिखा चुके हैं कि वो दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों को हारने में सक्षम हैं. साई प्रणीत का लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतने वाला पहला पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी बनने का होगा.

बैडमिंटन में भारत के ओलंपिक सफर की शुरूआत 1992 बार्सीलोना खेलों में दीपांकर भट्टाचार्य, विमल कुमार और मधुमिता बिष्ट ने की थी जब पहली बार इस खेल को खेलों के महाकुंभ में जगह मिली थी.

दीपांकर ओलंपिक में पहले ही प्रयास में क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रहे, जहां उन्हें तत्कालीन विश्व विजेता झाओ जियानहुआ के खिलाफ हारे थे. मधुमिता ने पहले दौर में आइसलैंड की एल्सा नीलसन के खिलाफ आसान जीत दर्ज की लेकिन दूसरे दौर में ग्रेट ब्रिटेन की जोआन मुगेरिज के खिलाफ हार गई.

विमल को भी पहले दौर में डेनमार्क के थॉमस स्टुए लॉरिडसेन के खिलाफ हारे थे. दीपांकर और विमल की जोड़ी भी पुरुष युगल में पहले दौर की बाधा को पार करने में नाकाम रही. चार साल बाद अटलांटा 1996 ओलंपिक में दीपांकर और पीवीवी लक्ष्मी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन ये दोनों ही पुरुष सिंगल्स और महिला सिंगल्स में दूसरे दौर में ही हार गए.


Share This News