July 23, 2021

Olympics : हॉकी के नियमों में किए गए ये बदलाव

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टोक्यो ओलंपिक में कोरोना के चलते हॉकी के फाइनल में पहुंची किसी टीम को बाहर होना पड़ता है तो सेमीफाइनल में उससे हारने वाली टीम को गोल्ड मैडल मैच में खेलने का मौका मिलेगा. रविवार को जारी खेलों के खेल-विशिष्ट नियम (एसएसआर) जो इंटरनेशनल ओलंपिक समिति (आईओसी) और इंटरनेशनल महासंघों (आईएफ) ने मिलकर बनाए हैं.

ये कोरोना पॉजिटिव होने से पड़ने वाले असर और टूर्नामेंट के फॉर्मेट में इसके मैनेजमेंट को निर्धारित करने के लिए बनाये गये हैं. इन नियमों के अनुसार, हॉकी में टीम कोरोना के चलते भाग नहीं ले पाती हैं तो वे ‘डिस्क्वालीफाई’ नहीं होंगी, बल्कि वो डीएनएस (शुरुआत नहीं कर पाईं) चिन्हित होगी.

नॉकआउट चरण में कोई टीम कोरोना की वजह से खेल नहीं सकती तो उनको हासिल न्यूनतम रैंकिंग सुरक्षित रहेगी और उस समय के हिसाब को देखते हुए उनकी प्रतिद्वंद्वी अगले दौर में चली जाएगी. इसके अनुसार, अगर कोई टीम फाइनल में हिस्सा नहीं ले पाती है तो कोरोना से प्रभावित होने वाली टीम द्वारा हारने वाली टीम को फाइनल में खेलने की परमिशन मिल जाएगी और वो गोल्ड मैडल के लिए खेलेगी.

सेमीफाइनल में दूसरी हारने वाली टीम को ब्रॉन्ज मैडल मिलेगा. हालांकि इन नियमों में फाइनल में पहुंची दोनों टीमों के पॉजिटिव आने की संभावित स्थिति का जिक्र नहीं है. वही ये भी नहीं बताया गया है कि कोरोना की वजह से अगर सेमीफाइनल में हारने वाली टीम भी प्रभावित होती है तो क्या होगा

पिछले महीने आईओसी कार्यकारी समिति ने सभी खेलों में निरंतरता के रखने के मद्देनजर तीन मुख्य सिद्धांत रेखांकित किए. अगर कोई खिलाड़ी या टीम टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पाती है तो किसी खिलाड़ी या टीम को कोरोना की वजह से ‘डिस्क्वालीफाई’ नहीं किया जाएगा. बल्कि डीएनएस लिखा जाएगा.

टूर्नामेंट के चरण को ध्यान में रखते हुए किसी खिलाड़ी या टीम का न्यूनतम नतीजा सुरक्षित रखा जाएगा. इसके अलावा जब कोई एथलीट या टीम नहीं खेल पाती है तो उनकी जगह अगले सर्वश्रेष्ठ एथलीट या टीम को उतारा जाएगा.


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