July 29, 2021

Review : स्टेट ऑफ सीज: टेम्पल अटैक में अक्षय खन्ना का अभिनय जोरदार

फोटो सोशल मीडिया

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जी5 पर वर्ष 2002 में गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले पर बेस्ड बॉलीवुड अभिनेता अक्षय खन्ना की नई फिल्म ‘स्टेट ऑफ सीज: टेम्पल अटैक’ रिलीज हो गई है. मल्टी स्टारर ‘स्टेट ऑफ सीज: टेम्पल अटैक’ में अक्षरधाम अटैक पर ही पूरी तरह से फोकस किया   गया है.

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फिल्म की कहानी 2001 से शुरू होती है जहां एनएसजी कमांडो हनुत सिंह (अक्षय खन्ना) अपनी टीम के साथ मिनिस्टर की बेटी को बचाने जाते हैं. यहां मंत्री की बेटी को बचाने के बाद सीनियर के ऑर्डर को नजरअंदाज करने की वजह से कुछ आतंकी हनुत के दोस्त को मार देते हैं, जिससे उसका आत्मविश्वास खत्म हो जाता है.

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रोहित बग्गा (विवेक दहिया) जो हनुत को खास पसंद नहीं करता, वही समीर (गौतम रोड़े) हनुत का अच्छा दोस्त है. इसके बाद कहानी सीधी 2002 में मोड़ लेती है, जहां एनएसजी की टीम गुजरात में जाती है.

टीम मंत्री की सिक्योरिटी के लिए भेजी जाती है लेकिन दूसरी ओर अभिमन्यु सिंह जो फिल्म में विलेन (आतंकी) के किरदार में है, उनके चार लड़के (आंतकी) अक्षरधाम मंदिर में हमला कर देते हैं.

अचानक हुए आतंकी हमले में कई लोगों की जान चली जाती है. ये आतंकी एक और आतंकी (बिलाल) को छुड़ाने के लिए एक-एक करके कई आम लोगों की जान लेने लगते हैं.

कमांडो हनुत सिंह के बहुत बोलने पर उसको स्थिति को हाथ में लेने की जिम्मेदारी मिलती है. इसके बाद वो अपनी टीम के साथ जाकर आतंकियों से भिड़ता है. हनुत किस तरह से आतंकियों को मौत के घाट उतारता है, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

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फिल्म में एक्टिंग की बात की जाये तो ये बेहतरीन है. अक्षय खन्ना ने फिर से साबित किया है कि वो हर एक रोल में फिट बैठते हैं. जिस तरह से अक्षय ने कमांडो हनुत सिंह का किरदार निभाया है,

उससे साफ लगता है कि उनसे अच्छा ये रोल कोई नहीं कर सकता था. विवेक, गौतम, समीर हर किसी ने अपने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. अभिमन्यु सिंह ने फिर से अपनी एक्टिंग से हैरान किया है.

फिल्म का डायरेक्शन केन घोष ने किया है. केन इससे पहले ‘फिदा’ और ‘इश्क- विश्क’ जैसी फिल्मों का डायरेक्शन कर चुके हैं. केन ने अक्षरधाम के अटैक जैसे खास विषय पर फिल्म बनाकर इसके साथ पूरा न्याय किया है.

फिल्म में उन्होंने हर चीज को खूबसूरती के साथ दिखाया है. फिल्म में सिनेमोटोग्राफी भी बेहतरीन है. छोटी-छोटी चीजों को डायरेक्टर ने सूझ-बूझ के साथ पेश किया है.

फिल्म के डायरेक्टर ने बेहतरीन तरीके से मूवी के अंतिम सीन से एक सस्पेंस भी छोड़ा है, जिससे लग रहा है कि फिल्म का अगला भाग भी जल्द रिलीज हो सकता है. अक्षरधाम हमले पर बनी ये फिल्म आपको पूरी तरह से बांधकर रखने का काम करेगी.

फिल्म अपने पहले सीन से लेकर आखिरी सीन तक कहीं भी ढीली पड़ती नजर नहीं आती है. फिल्म में गुजराती भाषा का प्रयोग हो या फिर लोगों की जान लेने का सीन हो. हर एक चीज शानदार तरीके से पेश किया गया है.

फिल्म में किसी भी तरह का एक्स्ट्रा मसाला नहीं लगाया गया है. इतना ही नहीं फिल्म एक परिवार की कहानी, एक बाप बेटे का प्यार, बच्चों का रूप हर एक को साथ में पिरोकर खूबसूरती के साथ दिखाया गया है.

फिल्म में देश प्रेम वाली भावना भी बखूबी दिखाया गया है. फिल्म को देखकर आपको अच्छा महसूस होगा. लेकिन अगर आप मसालेदार फिल्में देखना पसंद करते हैं तो ये फिल्म आपके के लिए नहीं है.


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