July 28, 2021

रिवर फ्रंट घोटाला : सीबीआई ने 3 राज्यों में 42 ठिकानों पर की छापेमारी

फाइल फोटो सोशल मीडिया

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लखनऊ : यूपी में पिछली सपा सरकार में हुए रिवर फ्रंट घोटाले की जांच में एक बड़ा कदम तब दिखा जब सीबीआई ने लखनऊ, कोलकाता, अलवर, सीतापुर, रायबरेली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, इटावा, अलीगढ़, एटा, गोरखपुर, मुरादाबाद और आगरा में एक साथ छापेमारी की.

इन  13 जिलों में पड़े छापे में 42 ठिकानों में तलाशी हुई और सीबीआई ने कई सुपरिंटेंड इंजीनियर और अधिशासी इंजीनियरों के खिलाफ  केस दर्ज किये है. यूपी सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग की ओर से लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे को आधार बनाकर सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने 30 नवंबर 2017 में नया मुकदमा दर्ज किया था.

फाइल फोटो सोशल मीडिया
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इसमें सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता (अब सेवानिवृत्त) गुलेश चंद, एसएन शर्मा व काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अब सेवानिवृत्त) शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह व रूप सिंह यादव तथा अधिशासी अभियंता सुरेश यादव नामजद रहे है. इसके बाद सीबीआई ने अपनी जांच में सिंचाई विभाग से हासिल पत्रावलियों की पड़ताल की और कुछ आरोपियों से पूछताछ भी की.

हालांकि इससे पहले राज्य सरकार ने अप्रैल 2017 में इस घोटाले की न्यायिक जांच कराई थी. ये जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति आलोक सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति ने की थी जिसमे  जांच में दोषी मिले ए इंजीनियरों व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की थी.

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फिर 19 जून 2017 को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डॉ. अंबुज द्विवेदी ने गोमतीनगर थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था और फिर  जांच सीबीआई को दे दी गयी थी.  इस मामले में सीबीआई जांच कर रही है कि प्रोजेक्ट में निर्धारित कार्य पूरा किये बिना ही स्वीकृत बजट की 95 प्रतिशत धनराशि किस तरह खर्च हुई.

प्रारंभिक जांच के मुताबिक प्रोजेक्ट में मनमाने तरीके से खर्च दर्शाकर सरकारी धन की बंदरबांट हुई  है. लगभग 1513 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में 1437 करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन  60 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो सका था. इसके साथ ही पहले से डिफाल्टर रही कंपनी को इस काम का ठेका देने का आरोप लगा था.


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