July 23, 2021

सीरीज रे की चारों कहानियां दमदार, लेकिन सीरीज की लंबाई थोड़ी अखरती

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मुंबई : तीन-चार अलग- अलग कहानियां दर्शकों को दिखाने ट्रेंड कई लम्बे टाइम से जारी है. नेटफ्लिक्स में बीते कुछ समय में लस्ट स्टोरीज, घोस्ट स्टोरीज और अजीब दास्तान रिलीज की गई.

जहां एक ही थाली में दर्शकों को अलग- अलग तरह का व्यंजन चखने को मिले, दर्शकों को कभी पूरी थाली पसंद आई तो कभी थाली की गिनी चुनी डिश.

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ऐसे में एक बार फिर नेटफ्लिक्स ‘रे’ के साथ अपनी नई मनोरंजन की थाली दर्शकों के लिए लाया है. ‘रे’ में इस बार आपको चार कहानियां दिखाई जाएगी. इन कहानियों के नाम हैं- फॉर्गेट मी नॉट, बहरूपिया, हंगामा है क्यों बरपा और स्पॉटलाइट.

पहली कहानी फॉर्गेट मी नॉट

रे की पहली कहानी ‘फॉर्गेट मी नॉट’ का डायरेक्शन श्रीजीत मुखर्जी ने किया है. ‘फॉर्गेट मी नॉट’ में अली फजल और श्वेता बसु प्रसाद अहम रोल में हैं. कहानी में अली फजल, इप्सित के रोल में होंगे, जिसकी मेमोरी कंप्यूटर से भी अच्छी बोली जाती है.

इप्सित कुछ भी नहीं भूलता है और उसकी पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ में सब कुछ एक दम परफेक्ट है. ऐसे में एक दिन उसकी मुलाकात एक लड़की से होती है, जो उसे कुछ ऐसा बताती है, जो इप्सित को याद नहीं है.

इसके बाद इप्सित के साथ कई ऐसी छोटी- छोटी चीजें होती हैं, जिससे उसको ऐसा महसूस होने लगता है कि वो चीजें भूलने लगा है. लेकिन कहानी का ट्विस्ट आपको हैरान करेगा,

श्वेता बसु प्रसाद का रोल आप पसंद करेंगे. ये कहानी दर्शकों को जरूर ये सोचने पर मजबूर करेगी कि क्या हम भी समय के साथ बदले हैं? और हां तो वो बदलाव सकारात्मक है या नकारात्मक?

दूसरी कहानी बहरूपिया

रे की दूसरी कहानी ‘बहरूपिया’ का डायरेक्शन भी श्रीजीत मुखर्जी ने किया है. सीरीज में के के मेनन एक मेकअप आर्टिस्ट इंद्राशीष के रोल में है, जिसका दिल एक एक्ट्रेस तोड़ देती है.

इंद्राशीष की दादी की मौत भी उसे अंदर से झकझोर देती है. ऐसे में इंद्राशीष अपने मेकअप स्किल्स की मदद से पहले अपने बॉस से बदला लेता है, जो उससे काफी परेशान रहता था.

धीरे- धीरे इंद्राशीष बहरूपिया बनकर अलग- अलग रूप धरता है, लेकिन एक बाबा को गलत साबित करने के चक्कर में एक रेपिस्ट का रूप धरना उसे भारी पड़ जाता है. इस कहानी का अंत भी शानदार है और कहीं न कहीं हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हमें हर इच्छा सोच समझकर मांगनी चाहिए.

तीसरी कहानी हंगामा है क्यों बरपा

एक ही फ्रेम में मनोज बाजपेयी और गजराज राव दिखे तो मजा आना लाजमी है. रे की तीसरी कहानी ‘हंगामा है क्यों बरपा’ का डायरेक्शन अभिषेक चौबे ने किया है.

कहानी में मनोज बाजपेयी, मुसाफिर अली के रोल में हैं, जिसकी मुलाकात ट्रेन के एक सफर के दौरान बेग (गजराज) से होती है, जो एक स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पूर्व पहलवान है.

सफर के दौरान मुसाफिर अली को याद आता है कि करीब दस वर्ष पहले भी उसने बेग के साथ सफर किया था और तब उसकी एक घड़ी चोरी की थी. इस घड़ी की चोरी के बाद बेग का बुरा समय शुरू हुआ था और मुसाफिर अली के अच्छे दिन.

कहानी के अंत में कुछ ऐसा होता है, जिससे मुसाफिर अली और बेग दोनों की जूझ रहे होते हैं. इस कहानी के वो कैमरा व एडिटिंग शॉट्स बेहतरीन हैं, जहां ट्रेन को महफिलों के सीन्स से जोड़ा है.

चौथी कहानी स्पॉटलाइट

रे की चौथी व अंतिम कहानी ‘स्पॉटलाइट’ का डायरेक्शन वासन बाला ने किया है. कहानी के आगाज में दिखाया गया है कि एक्टर विक (हर्षवर्धन कपूर) को उनके हर बार सेम लुक के चलते क्रिटिक्स पसंद नहीं करते हैं, लेकिन फैन्स के दिलों पर वो राज करते हैं.

विक की जिंदगी में सब अच्छा होता है, जब तक दिव्य दीदी (राधिका मदान) की एंट्री नहीं होती है. इसके बाद तो विक जो भी चाह रहा होता है वो दिव्य दीदी के चलते पूरा नहीं हो पा रहा है. दिव्य दीदी से नफरत करने वाले विक की आखिरकार मुलाकात दिव्य दीदी की से होती है और कहानी में आता है बड़ा ट्विस्ट.

चार घंटे की ‘रे’ में आपको चार अलग कहानियां देखने को मिलेगी और हर कहानी एक दूसरे से अलग है. ‘रे’ की लंबाई थोड़ी अखरती है, लेकिन कहानियों के अंत शानदार हैं और स्टार्स भी आपको कहानी के अंत तक बांधने में सक्षम नजर आ रहे हैं. ऐसे में आप ये सीरीज देख सकते हैं.


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