July 24, 2021

पृथ्वी पर सौर तूफान की इस स्पीड से इस समय हो सकती है टक्कर

प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया

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सूरज की सतह से उठा एक तूफान पृथ्वी की ओर 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की  स्पीड से से बढ़ रहा है जिसका  धरती के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाले अंतरिक्ष के क्षेत्र पर गहरा असर पड़ सकता है. इस बारे में मौसम की वेबसाइट स्पेसवेदर.कॉम के  मुताबिक  सूर्य के वायुमंडल से उत्पन्न सौर तूफानके चलते रात में आसमान के रौशनी से जगमगाने का नजारा उत्तर या दक्षिणी ध्रुव से देखा जा सकेगा.

अमेरिका के मौसम विभाग के मुताबिक इस तूफान से एक बड़े इलाके में हाई फीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन एक घंटे  बाधित हो सकता है. सबसे पहले इस तूफान का पता तीन जुलाई को चला था.  ये तूफान मंगलवार या बुधवार को धरती के ऊपरी वायुमंडल से टकरा सकता है.
प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया
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अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आंकलन है कि इस सौर तूफान से सैटेलाइट सिग्नल में रुकावट आ सकती हैं और  अनुमान है कि इस  तूफान की स्पीड 16 लाख किलोमीटर प्रतिघंटे से और बढ़ सकती है. वही स्पेसवेदर.कॉम ने बयान दिया कि सौर तूफान से धरती का बाहरी वातावरण गर्म होने से  उपग्रहों पर असर हो सकता है.

इसके चlते बिजली लाइनों में ज्यादा करंट बनने से ट्रांसफार्मर भी उड़ सकते हैं और साथ में यह जीपीएस नेविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटेलाइट टीवी पर बुरा असर पड़ सकता है. वैसे  सबसे पहला सौर तूफान इससे पहले साल 1859 में रिकॉर्ड हुआ था.

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वही 1972 में एक बड़े तूफान के चलते अमेरिका के मध्य पश्चिमी राज्यों में टेलीफोन लाइन अस्त व्यस्त हुई थी और 1989 में भी सौर तूफान से बिजली की लाइनें खराब होने से कनाडा के क्यूबेक इलाके में खासी दिक्कत हो गयी थी. हालांकि सौर  तूफानों के धरती पर असर के बारे में वैज्ञानिक पिछले दशक में ही जान सके है.

सौर तूफान या फ्लेयर के बारे में साल 1859 में  ब्रिटिश खगोलविज्ञानी रिचर्ड कैरिंगटन ने खोज की थी और कहा जाता है कि उस टाइम सूरज से निकली ऊर्जा  हिरोशिमा के 10 अरब एटम बमों के फटने के बराबर थी. वैसे उस समय धरती पर इतनी टेलीफोन और बिजली लाइन नहीं थीं, लेकिन इस समय हालत काफी अलग है और  लंबे टाइम तक बिजली के बिना होने वाले असर की कल्पना ही की जा सकती है.

प्रतीकात्मक चित्र सोशल मीडिया
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बताते चले कि सूरज के केंद्र में हाइड्रोजन कणों के बीच न्यूक्लियर रिएक्शन होने से हीलियम बनने के साथ सूरज में रोशनी पैदा होती है. वही सोलर मैक्सिमम के  समय सूरज की सतह पर काले दाग बनने से चुंबकीय क्षेत्रों में बड़ा बदलाव होता है जिससे सौर तूफान आते होते हैं. दूसरी और सोलर मिनिमम में सूरज में काफी स्थिरता होने से सतह पर तूफान नहीं आते है.

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वैसे वैज्ञानिकों के अनुसार प्रत्येक 11 साल में में सूर्य की सतह की हलचल और विस्फोट से इतना भारी विकिरण निकलता है जिससे अंतरिक्ष में बड़े सौर तूफान आ सकते है. इसका नया चरण साल 2019 में शुरू हुआ था और जुलाई 2025 में इसका चरम होग.


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