July 29, 2021

चीन के शुरुआती कोरोना केस के आंकड़े अमेरिकी डेटा बेस से क्यों हुए डिलीट 

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नई दिल्ली : कोरोना वायरस के जन्मदाता के रूप में चीन का नाम लिया जाता है तो दूसरी ओर वुहान की जिस लैब से वायरस लीक की बात की जा रही है. उस लैब को अमेरिकी फंडिंग की बात की जा रही है.

इस बीच तब सब लोग हैरान रह गए जब ये पता चला कि  कोरोना मरीजों के नमूनों की जांच और वायरस की जेनेटिक सिक्वेंसिंग के आंकड़े  अमेरिकी डेटा बेस से डिलीट कर दिए गए वो भी  चीनी शोधकर्ताओं के अनुरोध पर किया गया.

चीनी  शोधकर्ताओं ने किया था अनुरोध

दरअसल चीन में  सबसे पहले एकत्र किए गए कोरोना मरीजों के नमूनों की जांच और वायरस की जेनेटिक सिक्वेंसिंग से जुड़े आंकड़े अमेरिकी डेटा बेस में थे जिसके डिलीट होने के बारे में अमेरिकी अधिकारियों ने तर्क दिया कि डेटा बेस से आंकड़ों को डिलीट करने के लिए चीनी शोधकर्ताओं ने अनुरोध किया था.

अमेरिकी प्रोफेसर जेस ब्लूम की माने तो  सच पर पर्दा डालने के लिए चीन ने  आंकड़े डेटाबेस से हटवाये. रिसर्चर जेसी ब्लूम ने ये भी दावा किया कि उन्होंने इन डिलीट हुए वुहान के शुरुआती 241 केस के डेटा में से 13 केस के डेटा फिर जुटा लिए हैं.

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जानकारी के अनुसार चीनी शोधकर्ताओं ने अनुरोध किया था कि सीक्वेंस से जुड़ी जानकारी अपडेट कर दूसरे डेटा बेस पर जमा हो रही है. वही आगे दिक्कत से बचने के लिए अमेरिकी डेटा बेस से आंकड़ो को हटाया जाए.

इस बारे में फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक प्रोफेसर ब्लूम ने बोला कि मैं पहले ही  सुझाव दे चुका हूं कि चीन के आधिकारिक ऐलान से बहुत पहले ही कोरोना चीन में फैला था और चीन इस बारे में सच छिपा रहा है.  वैसे डेटा डिलीट करवाने से इस बात को बल मिला है कोरोना वायरस चीन की प्रयोगशाला में बना है.

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के पूर्व सलाहकार डोमिनिक कुमिंग्स  के अनुसार प्रोफेसर जेस ब्लूम की जानकारी कोरोना वायरस के लैब से फैलने की ओर इशारा करती है. वही साल के शुरू में जांच के लिए चीन का दौरा करने वाली विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक विशेषज्ञ टीम ने भी डेटा नहीं मिलने की बात की थी.

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वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति  का सच सामने लाने के लिए  खुफिया एजेंसियों को फिर से जांच का आदेश दिया है.  बताते चले कि  वुहान के शुरुआती 241 केस के ये कोरोना संक्रमितों के नमूनों की जांच से जुड़े डेटा अमेरिका के सिक्वेंस रीड आर्काइव में मार्च 2020 में जमा हुए थे लेकिन तीन महीने बाद डेटा जमा करने वाले शोधकर्ताओं ने जून में आंकड़े हटाने को कहा था.

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वही  अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार  डेटा जमा करने वाले शोधकर्ताओं का इसे  जब चाहें डिलीट करवाने का पूरा अधिकार है और इस पर कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता.  राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुआर डिलीट हुआ  डेटा वुहान में सबसे पहले जमा  किए गए कोरोना नमूनों की जांच और जीनोम सिक्वेंसिंग से जुड़े थे.


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