July 28, 2021

शरीर, वाणी व मन का एकीकरण योग है : प्रो.अभय कुमार जैन

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लखनऊ। अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान एवं उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग की ओर से अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर “ध्यान योग से वैश्विक एकता एवं शांति“ विषय पर वेबीनार का आयोजन सोमवार को किया गया. अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के अध्यक्ष भदन्त शान्ति मित्र ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि योग आज बहुत प्रचलित शब्द है.

“ध्यान योग से वैश्विक एकता एवं शांति“ विषय पर वेबीनार का आयोजन

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाये जाने से लोगों में इसके प्रति जागरूकता आई है.  बौद्ध मत में विपश्वना द्वारा योग की विभिन्न मुद्राओं में योग किया जाता है। विषय प्रवर्तन करते हुए उ.प्र. जैन विद्या शोध संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो.अभय कुमार जैन ने कहा कि आगम के अनुसार शरीर, वाणी व मन का एकीकरण योग है। आसन, प्राणायाम व ध्यान भी योग का रूप है.

प्रेक्षा ध्यान भी योग साधना का ही अंग है जो राग-द्वेष से निवृत्ति दिलाता है. केवल आसन व प्रणायाम से काम पूरा नहीं होता, निवृति और प्रेक्षा-ध्यान योग साधना के अनेक प्रयोग हैं जिनको नियमित करने से संयम और धैर्य की चरमता को प्राप्त किया जा सकता है.

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इन्द्रियों के संयम से अंतर्यात्रा प्रारम्भ हो जाती है। सर्वेन्द्रिय-संयम भी योग साधना का एक प्रयोग है. डॉ सुमेध थेरो ने विश्व कल्याण के लिए भारत द्वारा दिये गए विबिन्न विषयो में प्रकाश डाला और लोक कल्याण की भावना पर बल दिया. महर्षि  महेश योगी के अरुणेश मिश्र ने वैश्विक एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए वैश्विक शांति कि परिकल्पना पर बल दिया.

नानक चंद लखमानी उपाध्यक्ष सिंधी समाज, श्रीमति श्रद्धा सिंह प्रतापगढ़, राम प्रताप यादव इगतपूरी, भंते देवानंद, भदंत आर्यवंश, भंते शील रतन ने भी अपने विचार व्यक्त किये. संस्थान के निदेशक,डॉ राकेश सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया.


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